फतेहपुर। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) का असर अब उत्तर प्रदेश के मौसम पर भी दिखाई दे रहा है। इसी मौसमी सिस्टम के प्रभाव से पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और गरज-चमक का दौर देखने को मिला। चक्रवात 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद कमजोर पड़ गया, लेकिन इसके प्रभाव से मौसम में आए बदलाव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
जनपद फतेहपुर के सदर, खागा और बिंदकी तहसील क्षेत्र के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में बारिश से खेती-किसानी प्रभावित हुई है। खेतों में खड़ी धान की फसल भीग गई तो वहीं कटाई के बाद खेतों और खलिहानों में रखी धान की फसल भी बारिश की भेंट चढ़ गई। किसानों को अब फसल की गुणवत्ता खराब होने और अनाज के नुकसान की चिंता सता रही है।
धान पर मार, रबी की बुवाई भी प्रभावित
अभी किसानों के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर धान की फसल को समेटने की चिंता है, तो दूसरी ओर रबी सीजन की बुवाई पर बारिश ने ब्रेक लगा दिया है। गेहूं, चना, मसूर, मटर, जौ, सरसों, अलसी जैसी फसलों के साथ आलू और लहसुन की खेती की तैयारियां भी प्रभावित हुई हैं। खेतों में अधिक नमी और जलभराव के चलते कई जगह बुवाई का काम रुक गया है।
असोथर, बहुआ, भिटौरा, हसवा, तेलियानी, हथगाम, खागा क्षेत्र, धाता, विजयीपुर, ऐरायां, अमौली, देवमई और मलवां समेत जिले के ग्रामीण इलाकों में किसानों के सामने मौसम की चुनौती खड़ी है।
किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि खेती में पहले ही बीज, खाद, डीजल, जुताई और मजदूरी पर काफी खर्च हो चुका है। अब बेमौसम बारिश ने तैयार फसल और अगली फसल की तैयारी दोनों को प्रभावित कर दिया है।
किसानों की निगाहें अब आसमान पर!
महीनों की मेहनत के बाद जब फसल घर पहुंचने का समय आया, तब मौसम की मार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब किसान मौसम साफ होने और धूप निकलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि धान की कटाई-मड़ाई के साथ रबी की बुवाई का काम दोबारा शुरू हो सके।
सवाल यह है कि मौसम की इस मार से प्रभावित किसानों के नुकसान का आकलन कब होगा और उन्हें राहत कब मिलेगी?






