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गाँव से शहर तक ‘केक’ के नाम पर बांटा जा रहा ज़हर, फतेहपुर में कार्रवाई कब ?न्यू ईयर और बर्थडे समारोहों में ‘फैशन ट्रेंड’ बन चुका केक अब सेहत पर भारी

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फतेहपुर : न्यू ईयर सेलिब्रेशन, जन्मदिन और अन्य कार्यक्रमों में केक का चलन अब सिर्फ़ मिठाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक फैशन ट्रेंड के रूप में तेजी से स्थापित हो चुका है।
इसी बढ़ती मांग के कारण फतेहपुर जिले में केक का कारोबार गाँवों और कस्बों तक फैल गया है, जो अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

शहरों में जहां कुछ हद तक मानक और लाइसेंस व्यवस्था दिखाई देती है, वहीं जिले के खागा, बिंदकी, किशनपुर, असोथर, धाता, खखरेड़ू, हथगाम, गाजीपुर सहित कई कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना अनुमति, बिना पंजीकरण और बिना निरीक्षण के घटिया केक तैयार कर बेचे जा रहे हैं।
केक बनाने वाली अवैध छोटी बेकरी, घरों में चल रही केक यूनिटों और दुकानों पर कार्रवाई लगभग न के बराबर होती है। जिलें के इन कस्बों में बिना हाइजीन, बिना सफाई और बिना निरीक्षण के तैयार हो रहे ये केक बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सीधे खतरा बन गए हैं।
सूत्रों के अनुसार इन स्थानों पर सस्ते पामोलीन ऑयल,  घटिया क्रीम, सिंथेटिक फ्लेवर, प्रतिबंधित फूड कलर, तथा केमिकल युक्त सामग्री का प्रयोग कर केक तैयार किए जा रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे केक बच्चों में पेट संबंधी रोग, एलर्जी, लीवर और किडनी संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।

“इस समय चाहे न्यू ईयर सेलिब्रेशन, जन्मदिन एवं अन्य आयोजनों में केक का चलन अब फैशन ट्रेंड का रूप ले चुका है, जिसके चलते गाँवों से लेकर कस्बों तक केक की मांग अचानक बढ़ गई है।”

चिंता की बात यह है कि खाद्य विभाग समय-समय पर मिठाई की दुकानों पर कार्यवाही तो करता है, लेकिन अवैध केक बनाने वाली छोटी बेकरियों और घरों में चल रही इकाइयों पर कार्रवाई शून्य है। स्वच्छता मानक, खाद्य सुरक्षा नियम और निरीक्षण व्यवस्था की अनदेखी से आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि फतेहपुर खाद्य एवं औषधि विभाग जिलेभर में व्यापक जांच अभियान चलाकर बिना लाइसेंस संचालित केक कारोबार पर तत्काल रोक लगाए, ताकि खुशियों के अवसर पर काटा जाने वाला केक किसी के स्वास्थ्य के लिए खतरा न बने।

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