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निचली गंगा नहर की खादी कटी, 200 बीघा गेहूं डूबीबैरहना गांव में घरों तक पहुंचा पानी, किसानों का प्रदर्शन; मुआवजे की मांग तेज

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नरसिंह मौर्य, असोथर (फतेहपुर)।

असोथर नगर पंचायत क्षेत्र के बैरहना गांव के सामने निकली निचली गंगा नहर की खादी अचानक कट जाने से लगभग 200 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। सुबह-सुबह खेतों में तेजी से पानी भरने से किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई। देखते ही देखते पानी गांव की बस्तियों तक पहुंच गया और कई घरों में घुसने लगा, जिससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।

ग्रामीणों के अनुसार घटना सुबह करीब छह बजे की है। खादी कटने की सूचना मिलते ही नगर पंचायत अध्यक्ष नीरज सिंह सेंगर मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि जब तक टीम पहुंची, तब तक खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह पानी में डूब चुकी थी। स्थिति को गंभीर देखते हुए नगर पंचायत की टीम और जेसीबी मशीन लगाकर खादी को बंधवाने का काम शुरू कराया गया।

अध्यक्ष ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सुबह 8:30 बजे तक विभाग को सूचना देने के बावजूद कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। उनका कहना है कि निचली गंगा नहर की पिछले दो वर्षों से सफाई नहीं कराई गई है। नहर में जमी सिल्ट, काई और खरपतवार के कारण पानी का दबाव बढ़ गया, जिससे खादी कट गई। साथ ही आरोप लगाया कि कौशांबी जिले तक पानी पहुंचाने के दबाव में जलस्तर बढ़ाया गया, जिसके चलते यह स्थिति बनी।

इधर, सुजानपुर रजबहा को रनरों द्वारा बार-बार बंद किए जाने से भी किसानों को सिंचाई संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। किसानों का कहना है कि यदि नहर की समय-समय पर सफाई और निगरानी होती, तो इतना बड़ा नुकसान नहीं होता।

वहीं सिंचाई विभाग के जेई विकास कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही जरौली पंप कैनाल को बंद कर दिया गया और बौडर इसकेप खोल दिया गया है, ताकि पानी का दबाव कम किया जा सके। जलस्तर घटते ही खादी को स्थायी रूप से बंधवाने की कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना में किसान क्षत्रपाल सिंह गौतम, शिवकरन विश्वकर्मा, प्रमोद सिंह, सुनील सिंह, राजेश सिंह, राजू उर्फ धर्मेंद्र सिंह, विजय सिंह और सौरभ सिंह गौतम सहित अन्य किसानों की लगभग 200 बीघा गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर सर्वे कराकर शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग की है।

फिलहाल ग्रामीण अपने स्तर पर खेतों से पानी निकालने में जुटे हैं, लेकिन भारी नुकसान की आशंका से चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द राहत और मुआवजा नहीं मिला तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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