फतेहपुर। जिले में एक तरफ पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के नेतृत्व में भूमाफियाओं और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का अभियान चलाए जाने की चर्चा है, तो दूसरी तरफ एक क्षेत्राधिकारी (CO) के सरकारी आवास से जुड़ी कथित वायरल तस्वीर ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर में CO की गाड़ी के ठीक बगल में काले रंग की स्कॉर्पियो खड़ी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इस गाड़ी को जिले के एक चर्चित भूमाफिया से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, तस्वीर की स्वतंत्र पुष्टि और गाड़ी के वहां पहुंचने के कारणों को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि संबंधित भूमाफिया की कथित गतिविधियों की जांच फिलहाल एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्तर पर किए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में यदि जांच के दायरे में बताए जा रहे व्यक्ति की गाड़ी वास्तव में किसी पुलिस अधिकारी के सरकारी आवास पर पहुंची थी, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि मुलाकात किस उद्देश्य से हुई थी और क्या इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है?
प्लॉट के नाम पर रुपये लेने का भी आरोप
चर्चित भूमाफिया पर प्लॉट दिलाने के नाम पर दो स्वास्थ्य कर्मियों से रुपये लेने और वापस न करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि पीड़ितों ने इस मामले में मलवां थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप यह भी हैं कि बाद में कथित तौर पर अधिकारियों तक पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता, मामले की मौजूदा स्थिति और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई की पुष्टि संबंधित अभिलेखों और आधिकारिक पक्ष से होना जरूरी है।
अब CO आवास से जुड़ी वायरल तस्वीर ने इस पूरे प्रकरण को फिर से चर्चा में ला दिया है। यदि किसी ऐसे व्यक्ति की गाड़ी पुलिस अधिकारी के सरकारी आवास पर पहुंचती है, जिसकी गतिविधियों की जांच चल रही हो, तो पारदर्शिता के लिहाज से मुलाकात के उद्देश्य पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है। लेकिन केवल किसी गाड़ी के खड़े होने की तस्वीर के आधार पर किसी अधिकारी और कथित भूमाफिया के बीच मिलीभगत का निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा।
एसपी की कार्रवाई के बीच उठे सवाल
गौरतलब है कि जिले में जमीन के कारोबार से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर हाल के दिनों में चर्चा रही है। ऐसे में पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान की निष्पक्षता और प्रभावशीलता को लेकर जनता की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। यदि किसी अधिकारी के स्तर पर लापरवाही या नियमों के विपरीत किसी तरह का संपर्क सामने आता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
फिलहाल, CO आवास के बाहर कथित भूमाफिया की काली स्कॉर्पियो खड़ी होने की वायरल तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि संबंधित CO इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तस्वीर तथा उससे जुड़े दावों की जांच कराते हैं या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब जिले में भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई का अभियान चल रहा है, तो जांच के दायरे में बताए जा रहे व्यक्ति से जुड़ी इस तस्वीर की सच्चाई क्या है? इसका जवाब संबंधित अधिकारी के पक्ष, उपलब्ध साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकेगा।





