फतेहपुर जिले में 20 मई को लखनऊ में प्रस्तावित प्रदेश स्तरीय ग्राम प्रधान महा-आंदोलन को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। आंदोलन को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्ती शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में बहुआ ब्लॉक प्रधान संघ अध्यक्ष एवं सुजानपुर बहुआ देहात की ग्राम प्रधान हेमलता पटेल को मंगलवार शाम उनके निजी आवास पर ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार बहुआ चौकी प्रभारी अमरीश मिश्रा पुलिस टीम के साथ अचानक हेमलता पटेल के आवास पहुंचे और उन्हें लखनऊ जाने से रोकते हुए घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया। देर शाम तक उनके आवास के बाहर पुलिस का पहरा लगा रहा और पूरे इलाके में हलचल मची रही।
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। इसी मुद्दे को लेकर प्रदेशभर के ग्राम प्रधान “लोकतंत्र बचाओ, पंचायत बचाओ” अभियान के तहत 20 मई को राजधानी लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन करने जा रहे हैं। प्रशासन को आशंका है कि आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है, जिसके चलते पहले से ही सक्रिय प्रधान नेताओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद प्रधान संघ अध्यक्ष हेमलता पटेल के तेवर बेहद सख्त दिखाई दिए। नजरबंदी के दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शासन और प्रशासन पुलिस के दम पर ग्राम प्रधानों की आवाज को दबा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई गांवों के अधिकार और पंचायतों के सम्मान की है, जिसे किसी भी कीमत पर रोका नहीं जा सकता।
हेमलता पटेल ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय पर पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं है, तो मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों की तर्ज पर वर्तमान पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी लंबे समय तक प्रशासकों को सौंपना लोकतंत्र और ग्रामीण जनता दोनों के साथ अन्याय है। उनका कहना था कि गांवों का वास्तविक विकास केवल जनता द्वारा चुनी गई पंचायतें ही कर सकती हैं, न कि अफसरशाही।
उधर, हाउस अरेस्ट की खबर फैलते ही बहुआ ब्लॉक के ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। प्रधान संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पुलिसिया दबाव और दमन के बावजूद पंचायतों के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी।






