फतेहपुर जिले की खागा तहसील में एक ऐसी शादी चर्चा का विषय बन गई, जिसमें न दहेज मुख्य मुद्दा बना, न बैंड-बाजे का शोर… बल्कि “भौं-भौं” ने पूरा खेल बिगाड़ दिया। जी हां, पालतू कुत्ते की पिटाई ने सात फेरे शुरू होने से पहले ही रिश्ते की डोरी तोड़ दी। कहानी कुछ यूं है कि खागा कस्बे के एक युवक की शादी प्रयागराज की युवती से तय थी। बारात पूरे ठाठ-बाट के साथ गेस्ट हाउस पहुंची। जयमाल हुई, हंसी-ठिठोली हुई, फोटोशूट हुआ और रात भर रस्मों का सिलसिला चलता रहा। माहौल बिल्कुल फिल्मी था — लाइटें, म्यूजिक, मेहमान और मोबाइल कैमरे सब एक्टिव। भोर करीब चार बजे मंडप के नीचे जेवर चढ़ाने की रस्म चल रही थी। तभी कुछ दूरी पर बंधा दुल्हन का पालतू कुत्ता भौंकने लगा। अब वह भी आखिर घर का सदस्य ही था, शायद उसे भी रस्मों में हिस्सा लेना था! लेकिन तभी वर पक्ष के एक युवक ने आव देखा न ताव और कुत्ते पर हाथ उठा दिया।
बस… यहीं से कहानी ने यू-टर्न ले लिया।
दुल्हन पक्ष ने इसका विरोध किया। बात तू-तू मैं-मैं से शुरू होकर लाठी-डंडे और कुर्सियों तक पहुंच गई। शादी का मंडप कुछ ही मिनटों में अखाड़ा बन गया। कुर्सियां उड़ीं, लोग भागे, और कई लोगों के सिर फूट गए। वधू पक्ष से तीन लोग घायल हुए, वहीं वर पक्ष के भी दो लोग चोटिल हो गए।
हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुंची और मामला कोतवाली तक जा पहुंचा। घायलों का इलाज कराया गया। जब पुलिस ने दुल्हन से पूछा कि क्या वह शादी करना चाहती है, तो उसका जवाब साफ था — “नहीं।” शायद उसके लिए यह सिर्फ कुत्ते की पिटाई नहीं, बल्कि संवेदनशीलता की परीक्षा थी, जिसमें दूल्हा पक्ष फेल हो गया।
अगले दिन दोनों पक्षों के बीच लंबी पंचायत चली। लेन-देन, गिफ्ट और चढ़ावा सब वापस किया गया। शादी आधिकारिक रूप से टूट गई। किसी पक्ष ने लिखित शिकायत नहीं दी, इसलिए मामला समझौते के साथ खत्म हो गया।
लेकिन यह घटना कई सवाल छोड़ गई — क्या गुस्से में उठाया गया एक हाथ पूरे रिश्ते को तोड़ सकता है? क्या पालतू जानवर सिर्फ जानवर होते हैं या परिवार का हिस्सा? और सबसे बड़ा सवाल — क्या शादी के मंडप में इंसानियत की परीक्षा भी होती है?
फिलहाल खागा में यह शादी “भौंक” की वजह से टूटने के लिए चर्चा में है। लोग कह रहे हैं — यहां बारात तो आई थी, लेकिन फेरे से पहले ही मामला “डॉग डे आउट” बन गया।








