उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अपनी जनता पार्टी (AJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अब विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन का हिस्सा बनने जा रही है। जिसके बाद स्वामी प्रसाद मौर्य एक बार फिर चर्चाओं में हैं। बता दें कि अपने विवादित बयानों को लेकर पहले भी मौर्य चर्चाओं में रहे हैं। उनके कुछ बयानों पर विवाद भी हुआ। आपको बताते हैं उनके चर्चित विवादित बयानों के बारे में।
‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ के नारों पर बयान
नवंबर 2025 में स्वामी प्रसाद मौर्य ने ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ जैसे धार्मिक नारों को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ये नारे दंगा कराने और नफरत फैलाने का लाइसेंस बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार और उसके समर्थक इन नारों का इस्तेमाल धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।
रामचरितमानस को लेकर बयान से मचा विवाद
जनवरी 2023 में स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरितमानस को लेकर दिए गए बयान पर विवाद हुआ था। उन्होंने रामचरितमानस के कुछ अंशों को दलितों, महिलाओं और पिछड़े वर्गों के प्रति आपत्तिजनक बताया था और ऐसे अंशों पर रोक लगाने की मांग की थी। इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
भगवान राम और हनुमान को लेकर टिप्पणी
जून 2026 में स्वामी प्रसाद मौर्य के भगवान राम और हनुमान को लेकर दिए गए बयान ने भी विवाद खड़ा किया। उन्होंने कहा था कि भगवान राम और हनुमान दोनों धरती पर पैदा हुए थे और जो धरती पर पैदा हुआ है, वह धरती पर ही रहेगा। उन्होंने सूर्य और पृथ्वी के आकार का जिक्र करते हुए हनुमान जी के सूर्य को निगलने की कथा पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि पृथ्वी से सूर्य 13 लाख गुना बड़ा है और धरती पर पैदा होने वाला एक छोटा सा बंदर सूर्य को कैसे निगल सकता है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस संदर्भ में तथागत बुद्ध के संदेश का जिक्र करते हुए कहा था कि पहले जानो, फिर मानो। उन्होंने बिना सवाल किए हर बात मानने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया था।
ब्राह्मण समाज और हिंदू धर्म को लेकर बयान
अगस्त 2023 में स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिंदू धर्म और ब्राह्मणवाद को लेकर भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि हिंदू धर्म जैसा कुछ नहीं है और ब्राह्मण धर्म को ही हिंदू धर्म के तौर पर पेश किया गया है। उन्होंने ब्राह्मणवाद की जड़ों को गहरा बताते हुए समाज में मौजूद असमानताओं के लिए ब्राह्मणवाद को जिम्मेदार ठहराया था। उनका आरोप था कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को एक तरह के मकड़जाल में फंसाने की साजिश की गई। इस बयान की उस समय व्यापक चर्चा हुई थी।





