नरसिंह मौर्य, असोथर (फतेहपुर)
असोथर कस्बे स्थित प्राचीन ब्रह्मदेव मंदिर में सोमवार से सात दिवसीय मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। पहले ही दिन मेले में श्रद्धा, परंपरा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
मेले की खास परंपरा के तहत सैकड़ों महिलाओं ने मंदिर परिसर में ही खीर, पूड़ी, सब्जी और रोट बनाकर भगवान ब्रह्मदेव को विधि-विधान से भोग अर्पित किया। इसके बाद प्रसाद वितरण कर परिवार सहित भोजन ग्रहण किया गया। बुजुर्ग महिलाओं ने श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना कर नवविवाहित महिलाओं के सुख-समृद्धि की कामना की।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने मुंडन और कर्ण छेदन जैसे धार्मिक संस्कार भी संपन्न कराए। वहीं कथा श्रवण कर लोगों ने धर्म लाभ अर्जित किया। पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा।
मेले में सजी दुकानों पर दिनभर रौनक देखने को मिली। लोगों ने कप-प्लेट, टोकरी, कंगन, चूड़ी, तवा, चिमटा, कढ़ाई, कांच के बर्तन, खिलौने और श्रृंगार सामग्री की जमकर खरीदारी की। वहीं चाट के ठेलों पर पानीपुरी, चाट, बर्गर, चाउमीन और अन्य फिंगर फूड का आनंद लेते युवक-युवतियां नजर आए। गुल्लैया और जलेबी की दुकानों पर भी अच्छी-खासी भीड़ रही।
मेला कमेटी ने आगंतुकों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है। पदाधिकारियों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी शुक्रवार और शनिवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही स्पष्ट किया गया कि किसी भी प्रकार की अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर मेले के पहले दिन ने ही धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की शानदार तस्वीर पेश कर दी।






