फतेहपुर- ओवर लोडिंग,अवैध खनन में चुप्पी साधने वाले खादीधारियों के मौन का ‘राज’ केवल मलाई खाना रहा है।सिंडिकेट के चंगुल में फंसे नेता अपनी हिस्सेदारी ले भ्रष्टाचारियों के लूट के हिस्सेदार बन गए।एसटीएफ की हुई कार्रवाई ये बताने के लिए काफी है कि प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने भी अपनी जिम्मेदारियां की ओर से मुंह मोड़े रखा।कभी बांदा में तैनात रहे एक खनन अधिकारी का पूरे प्रदेश में चलने वाला सिंडिकेट का दौलतखाना करोड़ों में नहीं बल्कि अरबों में है।खनन एवं एआरटीओ दफ्तर के गठजोड़ के खेल ने हर दिन लाखों का खेल खेला।अपनी हिस्सेदारी लेकर उच्चाधिकारी दौलत के इस खेल के फंद के बाहर रहे।अब जब जांच का चाबुक चलना शुरू हुआ है तो सख्ती का डंडा दिखाया जा रहा है।जिसका नतीजा रहा कि प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी रात भर दौड़ते रहे और 111 भारी वाहनों का चालान काट कर 32 वाहनों को सीज किया जिनसे 08 लाख 19 हजार 500रू का जुर्माना वसूला गया है लेकिन हकीकत में खनन एवं एआरटीओ दफ्तर में अफसरों की दौलत की पड़ताल हो तो अकूत संपत्तियां इनके भ्रष्ट साम्राज्य का खुलासा करने के लिए काफी होगीं।यह अकेले इन दो विभागों की ही बात नहीं है।जिले के मलाईदार आधा दर्जन विभाग ऐसे हैं जहां कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक बेनामी अकूत संपत्तियों के मालिक बने बैठे हैं।फिलहाल एसटीएफ की रडार में भ्रष्टाचारियों कि सांसें फूल रही हैं।
फतेहपुर जनपद में तैनाती के बाद से ही खनन अधिकारी देशराज पटेल ईमानदारी का चोला ओढ़ कर कुर्सी पर बैठ गए लेकिन पर्दे के पीछे वसूली का जो खेल उन्होंने शुरू किया उससे अफसर भी जानकर अनजान रहे।हकीकत में तो उन्हें खदानों से निकलने वाले ट्रकों की भी इंट्री चाहिए थी।बांदा में तैनात रहे जिस खनन अधिकारी के ये रिश्तेदार हैं।उसका पूरे प्रदेश में सिंडिकेट यूं ही नहीं चलता है।सूत्र बताते हैं कि जनपदों में तैनाती के दौरान वसूली की बात कौन करे खदानों से हिस्सेदारी दबाव बनाकर लेना उसकी फितरत में शामिल रहा।यह काम आसान नहीं था लेकिन बिरादरी के सत्ताधारी नेताओं की खुशामद एवं छत्रछाया ने खनन अधिकारी के सिंडिकेट के काम को पूरे प्रदेश में ऐसा फैलाया कि उसने करोड़ 10 करोड़ नहीं बल्कि ₹500 करोड़ से अधिक की अकूत संपत्ति इकट्ठा कर ली।या यूं कहा जाए कि खनन एवं एआरटीओ दफ्तर में तैनात रहे कर्मचारियों-अधिकारियों की संपत्तियों की पड़ताल उनकी रईसी का मिजाज बताने के लिए काफी होगीं।
जिले में इतना कुछ होता रहा और प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की आंखें बंद रहीं।सही बात तो यह है कि संबंधित अधिकारी एवं ओवरलोड के निकलने वाले ट्रकों से थानों को भी नजराना मिलता रहा।जिसके चलते पुलिस ने मौन साधे रखा।ये वही पुलिस है जो आम गरीब जनता को हेलमेट,सीट बेल्ट,बीमा एवं आरसी में चौराहों में दौड़ा कर पकड़ती है।भ्रष्टाचार की कालिख ऐसा नहीं है कि खनन एवं परिवहन विभाग में ही पुती पड़ी है।लोक निर्माण विभाग,ग्रामीण अभियंत्रण,सिंचाई,राजस्व,विद्युत,स्वास्थ्य ऐसे विभाग है जहां हर दिन गरीबों का शोषण एवं सरकारी खजाने की लूट होती है।ग्राम पंचायतों,क्षेत्र पंचायतों एवं जिला पंचायत में विकास के लिए जाने वाले धन के बंदरबांट की हिस्सेदारी अफसर बंद आंखों से देखते रहते हैं।जांच के नाम पर खानापूरी एवं कार्रवाई के नाम पर दिखावा से कहीं ज्यादा सेटिंग-गेटिंग पर चल रहे जिले के विकास का बंटाधार करने में सत्ताधारियों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
नेताओं को खदानों से वसूली के अलावा मौरंग के ट्रक उनकी आकांक्षाओं को पूरा करते रहे तो ईमानदारी की डफली अपनी सरकार में वही नेता पीटते नजर आ रहे हैं जो विपक्ष में भ्रष्टाचार,अवैध खनन एवं ओवरलोडिंग को लेकर छाती पीटते थे।एसटीएफ की कार्रवाई के बाद जांच की जद में आयीं एआरटीओ,पीटीओ,लोकेटर,खनन अधिकारी एवं उनके करिंदों के अलावा 10 उन ढाबों पर कार्रवाई का इंतजार है जो अफसरों के लिए इंट्री की धनराशि को वसूलते थे।सत्ता के गलियारों से खबर तो यह भी है कि भ्रष्टाचार पर आंखें बंद कर सरकार की भद पिटवाने वाले जिले के और बड़े अफसर भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
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लूट का बंद आंखों से “तमाशा” देखते रहे अफसरों पर भी हो सकती है कार्रवाई इतने दिनों तक चलता रहा सिंडिकेट अफसरों को भनक तक नही लगी अब STF की कार्यवाई से मच गया हड़कम्प BJP नेता भी सिंडिकेट का बने हिस्सा
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