फतेहपुर- शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 415 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 415 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- वीणापाणि सरस्वती, मां, तेरा आह्वान।
अंतर्मन निर्मल करो, दो विद्या का दान।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- बने आत्मनिर्भर यह भारत, सारे जग में बने महान।
सदा स्वदेशी ही अपनायें,चले निरंतर यह अभियान ।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – दुर्गा दुर्गति- नाशिनी, करो दुष्ट संहार।
जगदंबा ,जगपालिनी, हो जग का उद्धार ।।
राम अवतार गुप्ता ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- श्री पंकज चौधरी जी,राजनीति में दक्ष ।
यूपी में भाजपा के, बने प्रदेशाध्यक्ष ।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – है संकल्प नए भारत का, हम कुछ कर दिखलाएंगे ।
छोड़ विदेशी वस्तु मोह, घर वस्तु स्वदेशी लाएंगे।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – विपति काल में धैर्य ही, आता सबके काम ।
धीर धुरंधर अवधपति,बने जगतपति राम ।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक मुक्तक के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किये – प्यार जिंदगी को जीना सिखला देता है।
हंस- हंस करके विष पीना सिखला देता है।।
पीड़ा भी मीठी- प्यारी लगने लगती है,
एक अलग ही दुनिया वह दिखला देता है।।
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।






