उत्तर प्रदेश के संभल से रमज़ान के पाक महीने में एक अनोखी और दिल को छू लेने वाली पहल सामने आई है।
जहां एक ओर सेहरी और इफ्तार के समय के लिए लोग मस्जिदों के ऐलान या मोबाइल अलार्म पर निर्भर रहते हैं, वहीं संभल के कुछ नौजवानों ने परंपरा और उत्साह का खूबसूरत संगम पेश किया है। अब यहां सेहरी और इफ्तार के समय ढोल-ताशों की गूंज सुनाई देती है।
सेहरी के लिए ढोल की थाप
सुबह तड़के जब पूरा मोहल्ला नींद में होता है, तभी ढोल-ताशों की आवाज़ गलियों में गूंज उठती है। यह आवाज़ रोज़ेदारों को सेहरी के लिए जगाने का संदेश देती है। ढोल की थाप के साथ नौजवान मोहल्लों में घूमते हैं और लोगों को समय पर आगाह करते हैं।
इफ्तार से पहले भी अनोखा अंदाज़
सिर्फ सुबह ही नहीं, बल्कि शाम को इफ्तार से पहले भी यही नज़ारा देखने को मिलता है। ढोल की गूंज लोगों को इफ्तार के वक्त की याद दिलाती है। इससे इलाके में रौनक और उत्साह का माहौल बन जाता है।
欄 भाईचारे और परंपरा का संगम
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहल सिर्फ समय बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी मेलजोल, एकजुटता और भाईचारे का संदेश भी देती है। रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और मोहब्बत का पैगाम देता है, और संभल की यह पहल उसी भावना को मजबूत कर रही है।
रमज़ान के इस पवित्र महीने में संभल की यह पहल अब चर्चा का विषय बन चुकी है। इबादत के साथ परंपरा और नई सोच का यह संगम लोगों को खासा पसंद आ रहा है।








