फतेहपुर। शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में साहित्यिक संस्था शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के तत्वावधान में 428वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार के.पी. सिंह कछवाह ने की, जबकि संचालन संस्था के आयोजक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। अध्यक्ष के.पी. सिंह कछवाह ने वाणी वंदना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“सरस्वती मां, आइये, करते हम आह्वान।
अंतर्मन निर्मल करो, दो कविता का दान।। ”
इसके बाद उन्होंने सामाजिक चेतना से ओतप्रोत पंक्तियों के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का संदेश दिया—
“अन्याय देख जो चुप रहता, वह भी अन्यायी होता है।
भीष्म पितामह सा योद्धा, वाणों की शैय्या सोता है।। ”
काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति, समाज और मानवीय मूल्यों पर आधारित भाव प्रस्तुत किए। डॉ. सत्य नारायण मिश्र ने छंद के माध्यम से मां दुर्गा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा—
“दुर्गा दुर्गति नाशिनी, करें दुष्टसंहार।
विपति विनाशिनी मां सदा, सबकी पालनहार।। ”
इसके बाद प्रदीप कुमार गौड़ ने जीवन में सकारात्मकता और आस्था का संदेश देते हुए कहा—
“संकट आते हैं, आएंगे, खुश रहने का जतन करो।
मां दुर्गा जब दुःखहारिणी, शाम-सबेरे भजन करो।। ”
डॉ. शिव सागर साहू ने आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देते हुए कहा—
“नफरत, घृणा विहाय कर, करें सभी से प्रीति।
आपस में सद्भाव हो, यही जगत की नीति।। ”
कार्यक्रम के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने वासंतिक नवरात्र और नववर्ष के आगमन पर अपने मुक्तक के माध्यम से सभी को शुभकामनाएं दीं—
“वासंतिक नवरात्र ले, आ पहुंचा नववर्ष।
सबमें हर्षोल्लास हो, मिटें शोक-संघर्ष।। ”
गोष्ठी के समापन पर मुख्य अतिथि पुजारी विजय कुमार शुक्ल ने सभी कवियों और उपस्थित साहित्य प्रेमियों को आशीर्वाद दिया। अंत में आयोजक द्वारा सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।







