उत्तर प्रदेश सरकार ने मदरसों में हर घर तिरंगा अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने विभाग को साफ आदेश जारी किए हैं कि 9 से 17 अगस्त तक प्रदेश के सभी मदरसों में देशभक्ति के कार्यक्रम हों। इसमें तिरंगा यात्रा, राष्ट्रगान, देशभक्ति गीत, भाषण, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं शामिल हैं। स्वतंत्रता सेनानियों पर चर्चा भी कराने को कहा गया है।
मदरसों में फहराना होगा तिरंगा, जमा करानी होगी फोटो-वीडियो रिपोर्ट
सरकार ने सिर्फ कार्यक्रम कराने तक सीमित नहीं रखा। जनपदवार रिपोर्ट, फोटो-वीडियो और अखबारों की कटिंग भी जमा करानी होगी। राज्यमंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के आह्वान पर यह अभियान चल रहा है। मदरसों के छात्रों को इससे जोड़ना जरूरी है ताकि राष्ट्रप्रेम की भावना बढ़े।
‘तिरंगा छतों पर नहीं, हमारे दिलों में है’
इस फैसले पर दिल्ली के आप विधायक चौधरी जुबैर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि भाजपा धार्मिक जगहों खासकर मस्जिदों और मदरसों को लेकर इतनी उत्साहित क्यों रहती है। वहां तिरंगा फहराने पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है। मैं बार-बार यही बात कहता आया हूं और देश के मुसलमान भी यही मानते हैं कि तिरंगा छत पर नहीं, दिलों में बसता है।
यूपी के हर मदरसे में 15 अगस्त को होगा आयोजन
जुबैर का यह बयान उस समय आया जब सरकार मदरसों में 15 अगस्त को झंडा फहराने और बड़े कार्यक्रम कराने की तैयारी कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह के अभियान का क्या मतलब है। उनके मुताबिक मुसलमानों के दिल में तिरंगा पहले से ही जगह बना चुका है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले यूपी की राजनीति गरमाई
सरकार का पक्ष साफ है। वह चाहती है कि मदरसों के बच्चे भी राष्ट्रगान गाएं, तिरंगा लेकर निकलें और देश के लिए अपना प्यार जताएं। कार्यक्रमों की तस्वीरें और वीडियो जमा कराने का मतलब है कि विभाग हर जिले से रिपोर्ट मांगेगा और देखेगा कि कितने मदरसे इसमें शामिल हुए।
इस पूरे मामले में दो तरफ की बातें सामने आ रही हैं। एक तरफ सरकार मदरसों को अभियान से जोड़ने की कोशिश कर रही है तो दूसरी तरफ विपक्षी नेता इसे धार्मिक स्थलों में दखल बता रहे हैं। जुबैर का बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है जहां लोग दोनों पक्षों पर अपनी राय दे रहे हैं।
अभियान 17 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान मदरसों में कई तरह के कार्यक्रम होने वाले हैं। सरकार का जोर है कि छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल हों। वहीं आलोचक पूछ रहे हैं कि क्या सिर्फ झंडा फहराने से राष्ट्रभक्ति साबित होती है या दिल की भावना ज्यादा मायने रखती है।







