भारतीय जनता पार्टी में बड़ा सांगठनिक बदलाव किया गया है।भाजपा ने गुरुवार को कई राज्यों में पार्टी के राज्य महासचिव (संगठनात्मक) और राज्य संयुक्त महासचिवों की नई सूची जारी कर दी है। इसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड भी शामिल हैं। यह फैसला आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को जमीनी और बूथ स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
धर्मपाल सिंह फिर से बने यूपी में संगठन महामंत्री
भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर धर्मपाल सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रदेश महामंत्री संगठन नियुक्त किया है। धर्मपाल सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश में संगठन के स्तर पर काम करने का लंबा अनुभव है। वर्ष 2022 में उन्हें उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश महामंत्री संगठन बनाया गया था। इसके बाद से वह लगातार इस पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। भाजपा के संगठन महामंत्री की भूमिका पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रदेश में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों और कार्यकर्ताओं से जुड़े कामों में संगठन महामंत्री की अहम भूमिका रहती है।
फणींद्रनाथ शर्मा बने उत्तराखंड के संगठन महामंत्री
भाजपा ने उत्तराखंड में भी नए प्रदेश संगठन महामंत्री की नियुक्ति की है। हरियाणा के प्रदेश संगठन महामंत्री फणींद्रनाथ शर्मा को उत्तराखंड का प्रदेश महामंत्री संगठन बनाया गया है। उत्तराखंड में यह प जून से खाली था। भाजपा ने 1 जून को अजेय कुमार को राजस्थान का प्रदेश महामंत्री संगठन नियुक्त किया था। इसके बाद उत्तराखंड के संगठन महामंत्री का पद रिक्त हो गया था। करीब 3 महीने बाद भाजपा ने इस पद पर फणींद्रनाथ शर्मा की नियुक्ति की है। अब वह उत्तराखंड में पार्टी के संगठन से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है लक्ष्य
2027 के आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के इस संगठनात्मक फेरबदल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में धर्मपाल सिंह को दोबारा संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दिए जाने से पार्टी के मौजूदा संगठनात्मक ढांचे में निरंतरता बनी रहेगी। वहीं उत्तराखंड में नई नियुक्ति के जरिए लंबे समय से खाली चल रहे पद को भरा गया है। इन नियुक्तियों से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ये बदलाव आगामी चुनावों की तैयारियों का हिस्सा हैं।





