लखनऊ। अखिल भारतीय असंगठित कामगार कांग्रेस के कोऑर्डिनेटर मिस्बाहुल हक ने उत्तर प्रदेश के संभावित बंटवारे और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर द्वारा उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की चर्चा ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मिस्बाहुल हक ने कहा कि इस तरह की मांगों को राजनीतिक दलों और उनके सहयोगी क्षेत्रीय दलों के व्यापक राजनीतिक हितों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपना दल की अनुप्रिया पटेल और निषाद पार्टी के संजय निषाद सहित विभिन्न क्षेत्रीय नेताओं द्वारा भी समय-समय पर क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे उठाए जाते रहे हैं।
उन्होंने सवाल किया कि क्षेत्रीय दलों के गठन और सत्ता में भागीदारी के बावजूद अतिपिछड़ी जातियों के सामाजिक अधिकार, आर्थिक विकास और संस्थानों में भागीदारी उस स्तर तक क्यों नहीं पहुंच सकी, जिसकी अपेक्षा मंडल आयोग की सिफारिशों से की गई थी। उन्होंने कहा कि ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग से विधायक, सांसद तथा त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रतिनिधित्व बढ़ने के बावजूद सामाजिक और आर्थिक भागीदारी के वास्तविक आंकड़ों पर सार्वजनिक बहस आवश्यक है। मिस्बाहुल हक ने जातीय जनगणना, सामाजिक न्याय और भागीदारी के मुद्दों को उठाने वाले राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि एनडीए के घटक दलों के नेताओं को भी सामाजिक न्याय से जुड़े सवालों पर अपनी स्पष्ट राय जनता के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मतदाता पुनरीक्षण और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता तथा संस्थागत संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के भीतर मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और डाटा प्रबंधन से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर मतभेद सामने आने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में आयोग की निर्णय प्रक्रिया, आपत्तियों और मतभेदों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि मतदाताओं का विश्वास कायम रहे। उनके अनुसार लोकतंत्र में प्रत्येक मत की समान संवैधानिक महत्ता है और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता इस विश्वास की बुनियाद है।
मिस्बाहुल हक ने कहा कि देश में चुनाव सुधार और निष्पक्ष चुनाव की चर्चा के दौरान पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन की कार्यशैली और चुनाव आयोग की संस्थागत भूमिका को अक्सर याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी ऐसी पारदर्शी और मजबूत संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है, जो प्रत्येक पात्र मतदाता के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को मजबूत कर सके।
Trending Now
2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी बंटवारा और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठे सवाल: असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस
👁 17.4K views





