फतेहपुर। साहित्य की सरस धारा को सतत प्रवाहित करते हुए शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के तत्वावधान में 425वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी का आयोजन मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता के पी सिंह कछवाह ने की, जबकि संचालन शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने प्रभावपूर्ण ढंग से किया। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।
गोष्ठी का शुभारंभ अध्यक्ष के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना के साथ किया। उन्होंने मां सरस्वती का आह्वान करते हुए कहा—
“मंच विराजो शारदे, धरूं चरण में शीश।
भाषा-अक्षर-ज्ञान का दो मुझको आशीष।।“
इसके पश्चात उन्होंने समसामयिक विषय पर दोहे के माध्यम से देश की प्रगति और आत्ममंथन का संदेश दिया—
“ए.आई. में विश्व में, बढ़ा देश का नाम।
पर कुछ अपने कर रहे, अपने को बदनाम।।“
डा. सत्य नारायण मिश्र ने जीवन की क्षणभंगुरता पर मार्मिक छंद प्रस्तुत करते हुए कहा—
“धन-घमंड नहिं कीजिए, पानी-बुलबुल आहि।
पलक-झपक बिलगात है, समय बदलते जाहि।।“
राम अवतार गुप्ता ने आध्यात्मिक भाव से ओत-प्रोत मुक्तक सुनाया, वहीं प्रदीप कुमार गौड़ ने बेटी और बहू के समान महत्व पर संवेदनशील रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना बटोरी।
डॉ. शिव सागर साहू ने फाल्गुन माह की उमंग और राष्ट्र एकता पर कविता प्रस्तुत की। हिमांशु कुमार जैसल ने बाल गीत के माध्यम से शिक्षा का महत्व बताया—
“अगर नहीं पढ़ने जाओगी, कैसे आगे बढ़ पाओगी।।“
अंत में आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने प्रेरणादायी मुक्तक सुनाते हुए कहा—
“इस छोटे से जीवन में ही, कुछ ऐसा कर जाओ।
जिससे याद करे यह दुनिया, अक्षय कीर्ति कमाओ।।“
कार्यक्रम के समापन पर पुजारी विजय कुमार शुक्ल ने सभी को आशीर्वाद दिया और आयोजक ने उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
साप्ताहिक काव्य गोष्ठी एक बार फिर साहित्य, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति का मंच बनकर उभरी।








