Fatehpur में सूदखोरी और बढ़ते ब्याज के दबाव का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पांच लाख रुपये का लिया गया कर्ज कुछ ही वर्षों में ब्याज सहित करीब 25 लाख रुपये तक पहुंच गया। कर्ज चुकाने के दबाव में पीड़ित को अपना करीब 50 लाख रुपये कीमत का मकान मात्र 27 लाख रुपये में बेचना पड़ा।
मामला शहर के मुराइनटोला इलाके से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि उनके बेटे अमर अखबार वितरण एजेंसी का काम करते थे। वर्ष 2015 में काम बंद करने का निर्णय लेने के बाद एजेंसी का करीब पांच लाख रुपये बकाया रह गया। इसी रकम को चुकाने के लिए एक अधिवक्ता से ब्याज पर पांच लाख रुपये उधार लिए गए।
बताया जाता है कि कर्ज लेते समय अधिवक्ता ने घर के कागजात अपने पास रख लिए थे। शुरुआत में ब्याज की रकम कम थी, लेकिन समय के साथ ब्याज लगातार बढ़ता गया। देखते ही देखते पांच लाख रुपये का कर्ज ब्याज सहित करीब 25 लाख रुपये तक पहुंच गया।
कर्ज चुकाने के लिए बेचना पड़ा मकान
जब कर्ज और ब्याज की रकम वापस करने का दबाव बढ़ने लगा तो परिवार के सामने कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा। वर्ष 2021 में सुशील श्रीवास्तव ने मुराइनटोला स्थित अपना मकान एक रिश्तेदार को लगभग 27.50 लाख रुपये में बेच दिया।
मकान की मौजूदा बाजार कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है, लेकिन मजबूरी में उसे आधे से भी कम दाम में बेचना पड़ा। मकान की बिक्री से मिली रकम में से लगभग 25 लाख रुपये कर्ज और ब्याज के रूप में दे दिए गए।
परिवार की आर्थिक हालत हुई कमजोर
घर बेचने के बाद बची हुई रकम से चौफेरवा क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख रुपये का छोटा सा प्लॉट खरीदा गया और उसी में एक कमरा बनाकर सुशील श्रीवास्तव अपने बेटे, पत्नी और भाई के साथ रहने लगे।
परिवार का कहना है कि छोटी सी रकम का कर्ज ब्याज के कारण इतना बढ़ गया कि अंत में उन्हें अपना घर तक गंवाना पड़ा।







