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फतेहपुर- वसूली के खेल में 10-ढाबे  1200-ट्रक  ₹5000 की इंट्री और 50-लोकेटर सिंडिकेट के आगे नतमस्तक रहे अब अफसर,एसटीएफ के फंद में फंसे

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फतेहपुर- ओवरलोड वाहनों की पासिंग में इंट्री के खेल में खनन विभाग,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय के साथ-साथ लोकेटरों के बड़े सिंडिकेट के आगे अफसर नतमस्तक ही रहे हैं।इंट्री का खेल कोई नया नहीं है।जग जाहिर भ्रष्टाचार पर अफसरों की बंद आंखों एवं चुप्पी ने भ्रष्टाचारियों की जड़ों को और मजबूती प्रदान की।जिले के 10 ढाबों 1200 गाड़ियां ₹5000 का शुल्क और 50 लोकेटरों की बड़ी फौज प्रयागराज,कानपुर,रायबरेली और बांदा की सीमा तक दिन रात धमा चौकड़ी मचाती रही और अफसर सोते रहे।ये तो नमूना मात्र है।’योगीराज’ में जिस भ्रष्टाचार के खात्में के दावे किए जा रहे हैं उसकी जड़े इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचारियों का बड़ा सिंडिकेट काम कर सरकारी खजाने की बाट लगा रहा है।कमीशन एवं हिस्सेदारी ने जिम्मेदारों को मौन धारण करा रखा है।
     फतेहपुर जनपद में अवैध खनन,ओवरलोडिंग को रोकने के लिए अफसरों ने केवल दिखावे ही किए।हकीकत तो यह रही कि जिन लोकेटरों के आगे विभाग नतमस्तक रहा उन्हीं के जरिए कई अफसरों के कर्मचारी भी हिस्सेदारी लेते रहे।तभी तो बड़े पैमाने पर होने वाली इन करतूतों पर लगाम नहीं लगाई जा सकी।मौरंग खदानों के संचालन के समय चेकिंग के लिए जाने वाले अफसरों ने ऊपरी दबाव के बाद खुद ही अपने कर्मचारियों से सूचनाएं पहुंचाई कि वह निरीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं और कार्रवाई के लिए कुछ न कुछ चाहिए।वे सिंडिकेट ही रहते हैं कि खनन विभाग के जरिए कुछ जेसीबी,ट्रक व अन्य सामग्री बरामद करा कागजी खानापूरी की जाती रही,जुर्माना लगाए जाते रहे लेकिन हकीकत में अवैध खनन और ओवरलोडिंग को रोका नहीं जा सका।गैर भाजपा सरकारों में भ्रष्टाचार,अवैध खनन,ओवर लोडिंग को लेकर चिल्ल-पों मचाने वाले सत्ताधारियों की घिग्घी बंधी हुई है या यूं कहे की भ्रष्टाचार की वैतरणी में गोते वे भी लगा रहे हैं।
     नेताओं की चुप्पी,अफसरों की सुस्ती का ही नतीजा रहा कि जिले के हर कोने में 10 ढाबे इंट्री के लिए चिन्हित कर दिए गए।इन ढाबों में खुलेआम इंट्री की वसूली की जाती रही।ढाबा संचालक भी अपने लिए ₹500 से ₹1000 अतिरिक्त वाहनों से लेते रहे।अफसरों के लिए दलाल बनें ये ढाबा संचालक फिलहाल कार्रवाई की जद से अभी दूर हैं।सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में केवल इंट्री के नाम पर ₹60 लाख रुपए महीने की वसूली के अलावा अन्य कामों से ₹40 लाख की कमाई ने अफसरों के हौसले इस तरह से बुलंद रखे कि उन्होंने उच्चाधिकारियों को भी ठेंगे पर रखा।विभागीय उच्चाधिकारी अपनी निर्धारित हिस्सेदारी को लेकर चुप्पी साधे रहे तो भ्रष्टाचारियों ने अपना जाल फैलाए रखा।इंट्री में ट्रकों से वसूली इस कदर रही की बांदा ₹5000,फतेहपुर ₹5000 और रायबरेली की इंट्री ₹8000 के अलावा अन्य जनपदों की इंट्री अलग-अलग निश्चित है।
     एआरटीओ एवं पीटीओ के बीच इंट्री की धनराशि का बंटवारा आधा-आधा होता रहा जबकि विभागीय उच्चाधिकारियों को महीने की निर्धारित धनराशि भेजी जाती रही।एसटीएफ द्वारा जनपद के थरियांव एवं रायबरेली के थाना लालगंज में दर्ज कराए गए 02 मुकदमों में एआरटीओ का प्राइवेट चालक,खनन अधिकारी,उनका गनर एवं तीन लोकेटर मुकदमें की जद में आए हैं।लालगंज में दर्ज कराए गए मुकदमें में एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा गौतम उनके चालक,पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी सहित 11नामजदों में रायबरेली के एआरटीओ अम्बुज एवं पीटीओ रेहाना भी वसूली गैंग की फेहरिस्त में शामिल हुए हैं।बड़े पैमाने पर सरकारी दफ्तरों में होने वाले भ्रष्टाचार का ही नतीजा है कि कुछ ही दिनों के अंतराल में कई तो रंगेहाथों विजिलेंस के द्वारा पकड़े भी जा चुके हैं लेकिन उसके बावजूद सरकार के खोखले दावों,अफसरों की सुस्ती,जिम्मेदारों की चुप्पी ने अवैध कमाई की लत पाले भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद कर रखे हैं।

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