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रफ्तार का कहर: यमुना एक्सप्रेस-वे पर बिछ गईं लाशें, कंटेनर की टक्कर से 6 यात्रियों के शरीर के उड़े चीथड़े

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रिपोर्ट- आलोक तिवारी

​मथुरा – उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेस-वे पर शनिवार का सूरज उगने से पहले ही मौत का तांडव मच गया। सुरीर थाना क्षेत्र में हुए एक रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे ने एक्सप्रेस-वे की सुरक्षा और ड्राइवरों की लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली से कानपुर की ओर जा रही एक प्राइवेट बस के छह यात्रियों को एक बेकाबू कंटेनर ने उस समय रौंद दिया, जब वे बस से उतरकर सड़क किनारे खड़े थे। मंजर इतना खौफनाक था कि एक्सप्रेस-वे पर चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और सड़क इंसानी खून से लाल हो गई।

​घटना सुबह तड़के की है। दिल्ली के नांगलोई से यात्रियों को लेकर एक निजी बस (स्लीपर कोच) कानपुर के रसूलाबाद के लिए रवाना हुई थी। जैसे ही बस सुरीर क्षेत्र के माइल स्टोन 88 के पास पहुंची, कुछ यात्रियों ने लघुशंका (Toilet) जाने के लिए बस रुकवाई। कायदे से बस को ‘ग्रीन जोन’ या टोल के पास रुकना चाहिए था, लेकिन चालक ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बस को एक्सप्रेस-वे की मेन लेन के किनारे ही खड़ा कर दिया। बस से आधा दर्जन से ज्यादा यात्री नीचे उतरकर किनारे पर खड़े थे, तभी पीछे से मौत बनकर आए एक तेज रफ्तार कंटेनर ने पूरी ताकत से बस के पिछले हिस्से में टक्कर मारी।

​प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो कंटेनर की रफ्तार 100 किमी/घंटा से अधिक रही होगी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि नीचे खड़े यात्रियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कंटेनर उन यात्रियों को रौंदता हुआ आगे निकल गया। टक्कर के बाद वहां का दृश्य देखकर राहगीरों की रूह कांप गई। औरैया के सोनू, बस्ती के देवेश, कन्नौज के अस्लम और दिल्ली के संतोष के शरीर के अंग सड़क पर बिखर चुके थे। चार लोगों की पहचान उनके दस्तावेजों से हुई, जबकि दो अन्य के शव इस कदर क्षत-विक्षत थे कि उनकी पहचान करने में घंटों लग गए।

​हादसे की सूचना मिलते ही एक्सप्रेस-वे सुरक्षा दल और सुरीर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। गंभीर रूप से घायल औरैया निवासी अमर दुबे को तत्काल एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने जब मृतकों के मोबाइल फोन से उनके परिजनों को कॉल किया, तो दूसरी तरफ से आने वाली चीखें सुनकर पुलिसकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं। किसी का भाई घर आ रहा था, तो किसी का बेटा काम से लौट रहा था, लेकिन एक लापरवाही ने हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया।

​अमूमन सर्दियों में कोहरा हादसों की वजह बनता है, लेकिन प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार ने स्पष्ट किया कि हादसे के वक्त मौसम साफ था। यह पूरी तरह से ‘रफ्तार की सनक’ और ‘असुरक्षित पार्किंग’ का मामला है। बस चालक ने एक्सप्रेस-वे के किनारे बस खड़ी करके यात्रियों की जान जोखिम में डाली, तो वहीं कंटेनर चालक ने अपनी रफ्तार पर काबू नहीं रखा।
​पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार कंटेनर चालक की तलाश शुरू कर दी है। एक्सप्रेस-वे पर कुछ घंटों के लिए यातायात बाधित हुआ, जिसे क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर बहाल किया गया।

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