फतेहपुर- शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 434 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 434 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां ,प्रार्थना, करो कुमति का नाश।
अंतःकरण पवित्र हो , रहे हृदय में वास ।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- पथ दर्शातीं पुस्तकें ,दूर करें अवसाद ।
यह जीवन की मित्र हैं ,मरने के भी बाद ।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – प्रेम दिखावत तबहिं तक, जब तक जीवन – प्राण।
प्राण- पखेरू उड़त ही नहीं पहचानत आन ।।
राम अवतार गुप्ता ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया – अगर आप हैं चाहते, सब पापों का नाश।
एकादशी व्रत मोहनी,व्रत है सब में खास।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – तेल- गैस का वैश्विक संकट ,सबकी है जिम्मेदारी।
सीमित हो प्रयोग अब इनका, सबसे बड़ी समझदारी।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – पूर्वांचल के एक्सप्रेसवे पर , यानों ने करतब दिखलाया।
उतरे और उड़े सड़कों पर, ताकत का एहसास कराया।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक लोकगीत के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किये – धरती धधकै, अंबर दहकै , सूरज मारै बान।
लपटन पवन लपेटै, भैया, गर्मी हरे परान ।। कि अब तो जीबो मुश्किल ।।
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।






