उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है। बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा और दक्षिण भारतीय अभिनेत्री फिरदौस बानो उर्फ ज़ारा खान ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की उपस्थिति में यूपी कांग्रेस के ज्वाइनिंग प्रभारी नितिन शर्मा ने दोनों को सदस्यता दिलाई। इस मौके पर कई अन्य कार्यकर्ता भी पार्टी में शामिल हुए। डॉ. वर्मा का सफर पीसीएस से शुरू होकर आईएएस तक पहुंचा और अब राजनीति में प्रवेश कर चुका है।
राकेश वर्मा का प्रशासनिक करियर
डॉ. राकेश वर्मा का जन्म 30 अक्टूबर 1969 को सीतापुर जिले में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बी.एससी., एम.ए. (मानव विज्ञान/समाजशास्त्र), एमबीए और अर्बन गवर्नेंस में पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके अलावा सिंगापुर के ली कुआन यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी से मास्टर्स इन पब्लिक पॉलिसी भी किया। 1997 बैच के पीसीएस अधिकारी के रूप में 1998 में सेवा शुरू की। लखनऊ में सुडा, युवा कल्याण, नगर निगम, ग्रामीण विकास, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स तथा अवस्थापना व औद्योगिक विकास विभाग में विशेष सचिव सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
आईएएस प्रोन्नति और वीआरएस का अनोखा फैसला
मई 2019 में उन्हें पीसीएस से आईएएस में प्रोन्नत किया गया और 2013 बैच आवंटित हुआ। लेकिन वीआरएस लेने के लिए उन्होंने आईएएस काडर छोड़कर पीसीएस में वापस आने का अनुरोध किया। केंद्र सरकार ने उनकी मांग स्वीकार कर ली और वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले सके। उद्योग विभाग सहित कई विभागों में उनके अनुभव को पार्टी चुनाव प्रचार में तकनीकी मदद के लिए उपयोगी मान रही है।
लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में
सेवानिवृत्ति के बाद डॉ. वर्मा ने लेखन को अपनाया। उनकी किताब ‘ट्रोल पुराण: राहु से राहुल की यात्रा’ चर्चा में रही, जिसमें राहुल गांधी की छवि और ट्रोलिंग पर विस्तार से लिखा गया है। मंगलवार को लखनऊ एयरपोर्ट पर उन्होंने यह किताब राहुल गांधी को भेंट की थी। सामाजिक क्षेत्र में वे 85 दिव्यांग बच्चों की परवरिश कर रहे हैं, जो उनके संवेदनशील व्यक्तित्व को दर्शाता है।
कांग्रेस ज्वाइन करने के पीछे की वजह
सदस्यता लेते हुए डॉ. वर्मा ने वर्तमान नौकरशाही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने मूल काम की बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त हैं। शिक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास न रखने वाले लोगों के हाथों में सत्ता होने की बात कही। राहुल गांधी और अजय राय के संघर्षों से प्रभावित होकर वे कांग्रेस में शामिल हुए। पार्टी को उम्मीद है कि उनके अनुभव से संगठन मजबूत होगा।







