फतेहपुर। शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 461 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं डॉ. शिवसागर साहू के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां, आइए,हम सब करें पुकार।
कविता का रस – छंद से, हो अनुपम श्रंगार।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- शिल्पी नूतन राष्ट्र के, थे सरदार पटेल।
रियासतों का देश में , करवाया था मेल।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – इस मृत्यु लोक का नियम यही, परिवर्तन ही परिवर्तन है।
यदि परिवर्तन से विमुख मनुज, जड़वत ही उसका जीवन है।।
राम अवतार गुप्ता ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- लौहपुरुष सरदार को, पूजे सब संसार ।
सत्कर्मों की ही सदा, होती जय – जयकार।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – रामचरितमानस सबको , जीवन का मर्म बताता है।
क्या, किसका दायित्व, धर्म क्या, जन-जन को सिखलाता है।।
आज की काव्य गोष्ठी के संचालक डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – अधिक ताप सहता हुआ, बहुत दिनों पश्चात।
हो परिवर्तित कोयला, हीरे में, विख्यात।।
अनिल कुमार तिवारी ‘निर्झर’ ने पढ़ा- चीनी की कीमत बढ़ी, महंगी हो गई दाल।
तेल गगनचुंबी हुआ, जनगण है बेहाल।।
उमाकांत मिश्र ने पढ़ा – बोझ मिथ्या भरम, तोड़तीं बेटियां।
दो घरों को सदा, जोड़तीं बेटियां।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने एक मुक्तक के माध्यम से अपने भाव कुछ इस प्रकार व्यक्त किये- मिट्टी का दीप फूटना है, फूटेगा ही , फिर भी हमको इतना कर्तव्य निभाना है।
मिट्टी के मिट्टी में मिलने से पहले ही, जग को उजियाले से जगमग कर जाना है।।
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक की ओर से आज की काव्य गोष्ठी के संचालक डॉक्टर शिवसागर साहू ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया ।






