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BLO की मौत के बाद उठे सवाल सोसाइट नोट पर अफसरों पर गम्भीर आरोप सियासत हुई तेज कांग्रेश के प्रदेश अध्यक्ष सोमवार को मिलेंगे परिवार से

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फतेहपुर से एक बेहद दर्दनाक और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और ड्यूटी के दबाव पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। बेटी की शादी से पहले छुट्टी न मिलने से आहत शिक्षामित्र और बीएलओ अखिलेश कुमार ने स्कूल परिसर में फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। अब इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।

क्या है पूरा मामला?

घटना फतेहपुर जिले के बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के अलियाबाद गांव की है। बताया जा रहा है कि अखिलेश कुमार एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) सर्वे में बीएलओ की ड्यूटी कर रहे थे। इसी बीच उनकी बेटी की शादी 8 मार्च को तय थी। परिजनों का आरोप है कि शादी की तैयारियों के बावजूद उन्हें छुट्टी नहीं दी गई, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान थे।

आरोप है कि ड्यूटी के दबाव और छुट्टी न मिलने से क्षुब्ध होकर अखिलेश कुमार ने स्कूल परिसर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद होने की बात सामने आई है, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए बिंदकी एसडीएम और ईओ को जिम्मेदार ठहराया है।

सियासत हुई तेज

घटना के बाद से राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने ऐलान किया है कि वह कल पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे।

इससे पहले कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सौंपी। कांग्रेस नेता शिवाकांत तिवारी ने भी परिवार को सहयोग देते हुए सरकार से 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

प्रशासन पर उठे सवाल

सुसाइड नोट में अधिकारियों का नाम आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बेटी की शादी जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक अवसर पर छुट्टी क्यों नहीं दी गई? क्या ड्यूटी का दबाव इतना ज्यादा था कि एक कर्मचारी को अपनी जान देनी पड़ी?

फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और सुसाइड नोट की भी विधिवत जांच कराई जाएगी।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों पर ड्यूटी के दबाव और संवेदनशीलता के अभाव को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और पीड़ित परिवार को न्याय कब तक मिल पाता है।

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