बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संविधान एवं कानून के दायरे में रहकर संघर्ष करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वोट की ताकत सबसे बड़ा अधिकार है और इसी शक्ति के माध्यम से समाज के वंचित, दलित, पिछड़े एवं उपेक्षित वर्ग अपने अधिकारों की रक्षा करते हुए सत्ता की “मास्टर चाबी” अपने हाथ में ले सकते हैं। उन्होंने लोगों से भावनाओं में बहकर हिंसा या सड़क पर उतरने के बजाय संवैधानिक व्यवस्था पर भरोसा रखने की अपील की।
संविधान के रास्ते पर संघर्ष की नसीहत
मायावती ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी प्रकार के अन्याय या उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई अवश्य लड़ी जानी चाहिए, लेकिन वह पूरी तरह संविधान और कानून के दायरे में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को न्याय पाने का अधिकार देता है और न्यायिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि यदि निचली अदालत से राहत नहीं मिलती तो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक जाने का पूरा अधिकार सभी को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि कानून के शासन में विश्वास बनाए रखना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए किसी भी विवाद या घटना के बाद लोगों को उकसाकर सड़कों पर उतारना उचित नहीं माना जा सकता।

वोट को बताया सबसे बड़ा लोकतांत्रिक हथियार
बसपा प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में वोट की ताकत सबसे प्रभावशाली शक्ति है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यदि समाज के लोग संगठित होकर अपने मताधिकार का सही उपयोग करें तो वे राजनीतिक बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम चुनाव और मतदान है, इसलिए लोगों को अपनी राजनीतिक भागीदारी बढ़ानी चाहिए।
मायावती ने कहा कि बसपा का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि समाज के उन वर्गों को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है जिन्हें लंबे समय तक अधिकारों से वंचित रखा गया।
कांशीराम और बाबा साहब के विचारों का किया उल्लेख
प्रेस वार्ता में मायावती ने बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी। उनका उद्देश्य समाज के कमजोर, दलित, पिछड़े और उपेक्षित वर्गों को सम्मान और राजनीतिक भागीदारी दिलाना था। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने भारतीय संविधान के माध्यम से करोड़ों लोगों को समान अधिकार और न्याय का रास्ता दिया। ऐसे में संविधान की मर्यादा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

हाल की घटनाओं का किया जिक्र
मायावती ने अपने संबोधन में मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज और हरदोई में हुई विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को न्याय अवश्य मिलना चाहिए, लेकिन इसके लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना के बाद लोगों की भावनाएं स्वाभाविक रूप से आहत होती हैं, लेकिन ऐसे समय में धैर्य और कानून पर भरोसा बनाए रखना अधिक आवश्यक होता है।
राजनीतिक स्वार्थ के लिए आंदोलन कराने का आरोप
बसपा प्रमुख ने बिना किसी दल या नेता का नाम लिए कहा कि कुछ लोग संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के लिए जनता को गुमराह कर सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आंदोलन कई बार समाज में तनाव बढ़ाते हैं और वास्तविक पीड़ितों की समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा, हंगामा, तोड़फोड़ और सड़क जाम जैसी गतिविधियों से किसी को न्याय नहीं मिलता। बल्कि इससे आम नागरिकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है।
घटनास्थलों पर राजनीति करने वालों पर निशाना
मायावती ने कहा कि कुछ राजनीतिक नेता किसी भी संवेदनशील घटना के बाद तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करते हैं। उनके अनुसार, इस प्रकार की राजनीति से पीड़ित परिवारों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, बल्कि कई बार माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना को राजनीतिक मंच बनाने के बजाय पीड़ितों को न्याय दिलाने और प्रशासन से उचित कार्रवाई कराने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।
शांतिपूर्ण संघर्ष का किया आह्वान
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमेशा संविधान, लोकतंत्र और शांतिपूर्ण संघर्ष का मार्ग दिखाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे उन्हीं आदर्शों का पालन करें और सामाजिक न्याय की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से लड़ें। उन्होंने कहा कि समाज में स्थायी परिवर्तन केवल संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत बनाकर और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।
सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करने का संकल्प
अपने संबोधन के अंत में मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी लगातार सत्ता की “मास्टर चाबी” हासिल करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य समाज के सभी कमजोर और उपेक्षित वर्गों को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाना तथा उन्हें सम्मानजनक भागीदारी दिलाना है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक सक्रिय रहने और वोट की ताकत के माध्यम से लोकतांत्रिक तरीके से परिवर्तन लाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि समाज संगठित होकर संविधान और लोकतंत्र के मार्ग पर आगे बढ़ेगा, तो सामाजिक न्याय और समानता का सपना अवश्य साकार होगा।






