Homeउत्तर प्रदेशफतेहपुर'जांच' करने आ रहे 'आयुक्त','चक-इटौली' के 'भ्रष्टाचारियों' को सताने लगा 'जेल' का...

‘जांच’ करने आ रहे ‘आयुक्त’,’चक-इटौली’ के ‘भ्रष्टाचारियों’ को सताने लगा ‘जेल’ का ‘भय’*आवास के बदले धन,शौचालय,मनरेगा में भ्रष्टाचार की 03साल पहले हुई थी शिकायत

Published on

फतेहपुर- जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारी खुलेआम तांडव कर रहे हैं।सरकारी खजाने को ग्राम पंचायतों में दीमक की तरह चट कर रहे प्रधानों,सचिवों एवं खंड विकास अधिकारियों में लगाम नहीं है जिनके ऊपर शिकंजा कसने की जिम्मेदारी है वह भ्रष्टाचारियों के तांडव पर डमरु बजा रहे हैं।भ्रष्टाचारी सत्ता संरक्षित शिष्टाचार में शामिल हो गए हैं।* हाई वोल्टेज ड्रामा वाली सरकंडी ग्राम पंचायत के बाद बहुआ विकास खंड की चक-इटौली इन दिनों चर्चा में है।आवास,मनरेगा,शौचालय के लिए आए सरकारी धन पर पड़े डांके की शिकायत 03 साल पहले हुई जरूर लेकिन जांच किनारे नहीं पहुंच सकी। *ये एक माननीय की ही कृपा रही कि भ्रष्टाचारियों के संरक्षक बन अफसरों तक को अपने रुतबे से नतमस्तक रखा।* जांच होती रही लेकिन परिणाम सामने नहीं आ सका।जो परिणाम भी आए उन पर धूल डालने की कोशिश की गई। *अब ग्राम पंचायत की जांच में नया मोड़ आया है।आगामी 02 व 03 फरवरी को आयुक्त ग्राम्य विकास अमनदीप दुली स्वयं आ रहे हैं।* शिकायतकर्ता की आंखों में अब जाकर चमक आई है।हो भी क्यों ना?एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की जांच पर आंच लाने की हिमाकत तो सहसा अधिकारी नहीं कर पाएंगे लेकिन सत्ताई खेल फिर भी होने की उम्मीद है। *जांच सही हुई तो सरकंडी की ही तरह आधा दर्जन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए जेल के दरवाजे खुले मिलेंगे।*
    फतेहपुर जिले के 13 विकास खंडों की 816 ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार का दीमक ऐसा लगा है कि इन्हें मारने के लिए कोई भी दवा काम नहीं कर रही है। *सरकारी विभागों की तरह ही ग्राम पंचायतों में बढ़े भ्रष्टाचार ने आम आदमी को बेबस,लाचार एवं बेदम कर रखा है।हालात ये हैं कि बड़े भ्रष्टाचारियों ने भगवा चोला ओढ़ लिया।इसी का नतीजा है कि उन पर कार्रवाई के बजाय अफसर उनके शिष्टाचार में रहते हैं।* बहुआ विकास खंड की चक इटौली ग्राम पंचायत में लाखों के हुए आवास के बदले धन,शौचालय एवं मनरेगा के भ्रष्टाचार की शिकायत नगर मंत्री भाजपा अधिवक्ता त्रितोष गुप्ता ने नवंबर 2022 में की थी। *एक के बाद एक हुई शिकायतों के बावजूद जांच किसी मुकाम तक नहीं पहुंच पाई।काफी जद्दोजहद के बाद मनरेगा लोकपाल की हुई जांच में ₹82 लाख रुपए के गड़बड़ झाले की पहली तस्वीर सामने आई।* एक ही काम को टुकड़ों में दिखा कर बार-बार आईडी बदलने के खेल,दूसरी ग्राम पंचायत में कराए गए काम पर मनरेगा लोकपाल ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने की सिफारिश की थी।
       *हद तो तब हो गई जब मनरेगा लोकपाल द्वारा जिला स्तरीय टीम से जांच करा कर ही भुगतान कराने की सिफारिश की लेकिन तत्कालीन उपायुक्त श्रम रोजगार ने जिलाधिकारी या मुख्य विकास अधिकारी से अनुमति लिए बगैर अपने स्तर से ही टीम गठित कर दी।अवर अभियंता द्वारा 29.09.2025 तक जांच रिपोर्ट दाखिल नहीं की गयी लेकिन इसी बीच तत्कालीन खंड विकास अधिकारियों ने एक के बाद एक लाखों के भुगतान कर दिए।जहां रिकवरी होनी थी वहां भुगतान यह बताने के लिए काफी है कि भ्रष्टाचार की लत किस तरह से अधिकारियों-कर्मचारियों को लगी रही।* जांच की आंच में तपने की आशंका में भुगतान के खेल में शामिल रहे कई कर्मचारियों ने जबरदस्ती भुगतान के लिए प्रधान पति द्वारा हस्ताक्षर कराने की लिखित रूप से अर्जी दी। *ग्राम पंचायत की गंभीर शिकायतें होने के बावजूद भी अधिकारियों ने सत्ता के दबाव में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की कोशिश नहीं की।*
     *प्रशासक काल में भुगतान करने,डबल पैन कार्ड,अपूर्ण शौचालय,आवास के बदले धन की वसूली,अपने खातों में पैसा लेने एवं अपनी ही फर्म नेशनल इंटरप्राइजेज पर भुगतान की शिकायत भाजपा नेता अधिवक्ता त्रितोष गुप्ता ने बार-बार अफसरों से की।गत 03 साल से चल रही जांच पर सत्ताई चाबुक ऐसा चला कि जांच की रफ्तार ही थम गई* लेकिन अधिवक्ता द्वारा अनशन की धमकी के बाद जिलाधिकारी के आदेश पर जांच समिति गठित कर दी गई जो अभी जांच ही कर रही है।जांच में नई उम्मीद जगी है।शासन पर हुई शिकायत के बाद प्रकरण को गंभीर मानते हुए ग्राम्य विकास आयुक्त अमनदीप दुली स्वयं एक दिन रुक कर यहां जांच करेंगे। *अब एक बात साफ है कि अगर जांच सही दिशा में गई तो सरकंडी की ही तरह तत्कालीन बीडीओ कुतुबुद्दीन,मनोज अग्रवाल,मौजूदा खंड विकास अधिकारी जयप्रकाश सहित ग्राम विकास अधिकारी,रोजगार सेवक अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी,ग्राम प्रधान कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।* आयुक्त की जांच को लेकर जिम्मेदारों की धड़कनें तेज हुई हैं *अधिकारियों-कर्मचारियों को सरकंडी की कार्रवाई की उजली हुई तस्वीर से सलाखों का भय सताने लगा है।सब ठीक रहा तो चक-इटौली के कुछ और भ्रष्टाचारियों को जेल की हवा खानी पड़ सकती है।*

👁 16.7K views
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Latest articles

अब भी परिजनों के मोह से आगे नहीं बढ़ पा रहीं मायावती, क्यों नहीं बन पाईं बहुजन की नेता?

उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों में विधान सभा चुनाव होने हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती का कहना है कि वह राज्य में पांचवी बार बसपा की सरकार बनाने के लिए तैयारी में जुटी हैं। लेकिन, चुनाव से पहले उनकी पार्टी में जैसी उथल-पुथल है, उसे देखते हुए लगता है कि मायावती […]

जातीय हिंसा और हत्याओं के बाद गरमाई सियासत! यूपी में 2027 चुनाव से पहले जाट, ब्राह्मण और निषाद वोट बैंक पर छिड़ी जंग

UP Caste Politics Jat Brahmin Nishad Vote Bank 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपराध कोई नई बात नहीं है। लेकिन हाल के तीन हत्याकांडों ने सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं छोड़ा, बल्कि जातीय नैरेटिव और वोट बैंक की सियासत को भी गरमा दिया है। अंकित बालियान, विनोद कुमार साहनी और शिवकुमार त्रिपाठी की मौतों […]

CM Yogi ने दिए बड़े निर्देश: यूपी में 681 प्रमुख मार्ग होंगे गड्ढामुक्त, बारिश बाद होगा स्थायी नवीनीकरण

UP Roads,Pothole Free Roads: उत्तर प्रदेश में बारिश और बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश अभी जारी है, इसलिए सड़क की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और जो मार्ग बारिश या […]

More like this

अब भी परिजनों के मोह से आगे नहीं बढ़ पा रहीं मायावती, क्यों नहीं बन पाईं बहुजन की नेता?

उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों में विधान सभा चुनाव होने हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती का कहना है कि वह राज्य में पांचवी बार बसपा की सरकार बनाने के लिए तैयारी में जुटी हैं। लेकिन, चुनाव से पहले उनकी पार्टी में जैसी उथल-पुथल है, उसे देखते हुए लगता है कि मायावती […]

जातीय हिंसा और हत्याओं के बाद गरमाई सियासत! यूपी में 2027 चुनाव से पहले जाट, ब्राह्मण और निषाद वोट बैंक पर छिड़ी जंग

UP Caste Politics Jat Brahmin Nishad Vote Bank 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपराध कोई नई बात नहीं है। लेकिन हाल के तीन हत्याकांडों ने सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं छोड़ा, बल्कि जातीय नैरेटिव और वोट बैंक की सियासत को भी गरमा दिया है। अंकित बालियान, विनोद कुमार साहनी और शिवकुमार त्रिपाठी की मौतों […]