फतेहपुर- शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 407 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 407 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के. पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल जी उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के. पी . सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- दीप पर्व पर अर्चना ,करो स्वप्न साकार।
मातु शारदे, दो मिटा अंतस का अंधियार।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- दीप मालिका पर्व में , हो सर्वत्र प्रकाश।
ऐसे दीप जलाइये , हो अंतर्तम नाश।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – राम रसायन पानकर, रामहि राम पुकार।
तुलसी रामहि में रमे, भक्तों के सरदार ।।
राम अवतार गुप्त ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- दीपावली वहीं होती है, जहां राम जी जाएं ।
राम नाम मणि मुख में रखकर ,घट- घट दीप जलाएं ।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – दीवाली की लाख बधाई ,कृपा महालक्ष्मी की हो ।
बच्चे जहां पटाखे फोड़ें, संग में कोई बड़ा भी हो ।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – ज्योति पर्व दीपावली, मना रहा सब देश।
दीपक की लौ दे रही, राष्ट्र भक्ति संदेश।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव इस दीपमालिका पर्व पर एक गीत के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किये – इन दियों में दिया एक वह भी जले,जो सभी के दिलों में उजाला करे।
दुष्टता – धूर्तता का अंधेरा मिटा, न्याय – सद्धर्म की ज्योति ढाला करे।। आगे पुनः पढ़ा- जिंदगी सहमी हुई है राह में।
मौत मुस्काती खड़ी उत्साह में।।
आदमी ही, जो सतत संघर्षरत,
बढ़ रहा प्रतिपल विजय की चाह में।।
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।






