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“नक्शा पास या बुलडोज़र पास?” चूड़ी वाली गली में अवैध कॉम्प्लेक्स पर सख्त नोटिस, मुतवल्लियों पर भी शिकंजा “शपथ समाचार की खबर का बड़ा असर

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फतेहपुर। शहर कोतवाली क्षेत्र की चूड़ी वाली गली में बना कथित अवैध कमर्शियल कॉम्प्लेक्स अब प्रशासनिक कार्रवाई की जद में आ गया है। मस्जिद के मुतवल्लियों द्वारा मनमाने ढंग से फंडिंग जुटाकर दुकानों का निर्माण कराए जाने के मामले में उप जिलाधिकारी/नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र ने सख्त रुख अपनाते हुए ढहाने का आदेश जारी कर दिया है। सात दिन की मोहलत के साथ भेजे गए नोटिस ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है।

क्या है मामला?

बताया जा रहा है कि संबंधित निर्माण बिना विधिवत अनुमति और नक्शा पास कराए कराया गया। प्रशासन के अनुसार, उत्तर प्रदेश (निर्माण विनियमन) अधिनियम, 1966 की धारा-10 के तहत पहले भी संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया गया था। 9 जनवरी 2026 और 23 जनवरी 2026 को तिथियां निर्धारित की गईं, लेकिन “कारण बताओ” नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया—निर्माण स्वयं हटाइए, अन्यथा प्रशासन कार्रवाई करेगा।

सात दिन की उलटी गिनती

जारी आदेश में सात दिन की समय-सीमा तय की गई है। यदि निर्धारित अवधि में अवैध निर्माण नहीं हटाया गया तो प्रशासन स्वयं ध्वस्तीकरण कराएगा और उसका खर्च संबंधित पक्ष से वसूला जाएगा। यानी दीवार भी जाएगी और जेब पर भी असर पड़ेगा।

शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत भाजपा नेता रमीज खान की शिकायत से हुई बताई जा रही है। उन्होंने अवैध निर्माण की लिखित शिकायत की थी। अब प्रशासनिक आदेश जारी होने के बाद इसे उनकी “मेहनत का नतीजा” माना जा रहा है।

वहीं, सूत्रों के अनुसार मामले में एक शिकायतकर्ता, जिसने कॉम्प्लेक्स में दुकानें ले रखी थीं, वह भी जांच और संभावित कार्रवाई की परिधि में आ सकता है। इससे व्यापारी वर्ग में भी बेचैनी बढ़ गई है।

मोहल्ले में चर्चा तेज

नोटिस के बाद चूड़ी वाली गली में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई इसे प्रशासन की सख्ती बता रहा है तो कोई कह रहा है कि अब “पहले नक्शा, फिर निर्माण” का नियम सख्ती से लागू होगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह कार्रवाई अमल में आती है तो अन्य अवैध निर्माणों पर भी असर पड़ सकता है।

प्रशासन का संदेश साफ

जानकारों का कहना है कि विनियमित क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण करना कानूनी जोखिम है। यह कार्रवाई एक संकेत हो सकती है कि अब नियमों की अनदेखी पर सीधा प्रहार होगा।

फिलहाल निगाहें इस पर टिकी हैं कि संबंधित पक्ष सात दिन में क्या कदम उठाता है—क्या खुद दीवारें गिरेंगी या फिर बुलडोज़र दस्तक देगा? इतना तय है कि फतेहपुर में “नोटिस की दस्तक” ने यह साफ कर दिया है—नियमों से खेलोगे तो खेल कभी भी खत्म हो सकता है।

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