शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में शक्ति आराधना के साथ महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा आत्मनिर्भरता का संदेश भी गूंजेगा। योगी सरकार मिशन शक्ति के तहत नवरात्र की सप्तमी से नवमी तक चयनित देवी मंदिरों में तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराएगी। इन आयोजनों में पारंपरिक देवी गीतों का गायन और दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रमुख आकर्षण होंगे। कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं तथा बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा और स्वावलंबन के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
इस पहल के तहत स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। सरकार की योजना के अनुसार, प्रत्येक चयनित मंदिर में तीन स्थानीय कलाकार प्रस्तुतियां देंगे। इस तरह कुल 26 मंदिरों में 78 कलाकारों को मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इनमें महिला कलाकारों को विशेष प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के इस प्रयास का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों को सामाजिक जागरूकता और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने का माध्यम बनाना है।
देवी गीतों और दुर्गा सप्तशती के पाठ से भक्तिमय होंगे मंदिर
नवरात्र की सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथियों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में देवी आराधना से जुड़े पारंपरिक गीतों को विशेष स्थान दिया जाएगा। मंदिर परिसरों में कलाकार देवी गीतों के माध्यम से शक्ति की महिमा का गुणगान करेंगे। इसके साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ भी होगा, जिससे धार्मिक वातावरण और भक्तिमय बनेगा। इन आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाना भी है। मिशन शक्ति के तहत महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। इससे धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं तक सामाजिक जागरूकता का संदेश पहुंचाने का प्रयास होगा।
26 मंदिरों में 78 स्थानीय कलाकारों को मिलेगा अवसर
योगी सरकार की इस पहल में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। प्रत्येक चयनित मंदिर में तीन कलाकारों को प्रस्तुति का अवसर दिया जाएगा। इस हिसाब से 26 मंदिरों में कुल 78 कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर सकेंगे। आयोजन में महिला कलाकारों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने से उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से पारंपरिक देवी गायन और लोक संगीत से जुड़े कलाकारों के लिए ऐसे कार्यक्रम उपयोगी साबित हो सकते हैं।
इससे क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। लखनऊ और प्रयागराज के प्रमुख मंदिरों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लखनऊ के चंद्रिका देवी और संकटा देवी मंदिर तथा प्रयागराज के अलोपी देवी और ललिता देवी मंदिर में तीन-तीन कलाकार प्रस्तुति देंगे। इन चार मंदिरों में कुल 12 कलाकारों को अवसर मिलेगा। अन्य चयनित मंदिरों में भी इसी व्यवस्था के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।
महिलाओं की सुरक्षा और स्वावलंबन पर रहेगा जोर
मिशन शक्ति के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा आत्मनिर्भरता को प्रमुखता दी जाएगी। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा कि महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को जागरूक करने के साथ स्थानीय स्तर पर उनकी भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। महिला कलाकारों को मंच देने की पहल इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है। हालांकि, कार्यक्रमों के दौरान जागरूकता गतिविधियों का स्वरूप और अन्य व्यवस्थाएं संबंधित विभाग की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार होंगी।
धार्मिक आयोजनों से सामाजिक बदलाव की पहल
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि शारदीय नवरात्र आस्था, शक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं का पर्व है। सरकार का प्रयास है कि धार्मिक आयोजन सामाजिक बदलाव का माध्यम बनें और महिलाओं तथा बालिकाओं को सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय कलाकारों, विशेषकर महिला कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। इससे पारंपरिक देवी गीतों और लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ कलाकारों की आजीविका को भी सहारा मिल सकता है। सरकार की इस पहल में धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जागरूकता को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में होंगे आयोजन
इस त्रिदिवसीय कार्यक्रम के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित प्रमुख देवी मंदिरों का चयन किया गया है। इनमें मिर्जापुर का मां विंध्यवासिनी मंदिर, वाराणसी का विशालाक्षी मंदिर, प्रयागराज के अलोपी देवी और ललिता देवी मंदिर, बलरामपुर का देवीपाटन मंदिर, सहारनपुर का शाकुंभरी देवी मंदिर और मथुरा का कात्यायनी देवी मंदिर शामिल हैं। इसके अलावा जौनपुर के मां शीतला चौकिया धाम, प्रतापगढ़ के बेल्हा देवी मंदिर, गोरखपुर के मां तरकुलहा देवी धाम, चित्रकूट के मां सिंह वाहिनी काली देवी मंदिर, हमीरपुर के गायत्री शक्तिपीठ और घाटमपुर के कुष्मांडा देवी मंदिर समेत कई अन्य धार्मिक स्थलों पर भी आयोजन प्रस्तावित हैं। लखनऊ के चंद्रिका देवी और संकटा देवी मंदिरों को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
लोक संस्कृति और कलाकारों को प्रोत्साहन देने की तैयारी
नवरात्र के दौरान होने वाले इन आयोजनों से प्रदेश की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की उम्मीद है। देवी गीत उत्तर भारत की लोक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय गायन शैलियों को सार्वजनिक मंच मिलने के साथ कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर भी मिलेगा। सरकार की इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष धार्मिक पर्यटन और स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना भी है। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भागीदारी के बीच आयोजित होने वाले कार्यक्रम क्षेत्रीय कला और परंपराओं को नई पहचान देने में मदद कर सकते हैं। अब आयोजन की तैयारियों और कलाकारों की प्रस्तुतियों के जरिए यह पहल जमीन पर किस तरह आकार लेती है, इस पर नजर रहेगी।





