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फतेहपुर के कथित भूमाफिया के भाई को झांसी पुलिस ने दबोचा! गिरफ्तारी के बाद थाने में जुटीं लग्जरी गाड़ियां, विधायक की सिफारिश की भी चर्चा

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मूर्ति चोरी से लेकर जमीन के खेल और अयोध्या के संत से लाखों रुपये की कथित ठगी तक, अब गिरफ्तारी के बाद संरक्षण के आरोपों ने पकड़ा तूल

फतेहपुर। जिले में कथित भूमाफिया के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मेडिकल कॉलेज के आसपास किसानों की जमीन से जुड़े विवादों और अयोध्या के एक संत से लाखों रुपये लेने के आरोपों के बीच अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। बताया जा रहा है कि कथित भूमाफिया के भाई को झांसी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद दर्जनों लग्जरी गाड़ियों से लैस लोगों के थाने पहुंचने और गिरफ्तार युवक को राहत दिलाने के प्रयासों की चर्चाएं भी सामने आई हैं। सूत्रों के दावों के मुताबिक, सत्ता से जुड़े एक विधायक द्वारा भी सिफारिश किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

गिरफ्तारी के बाद थाने में जुटे रसूखदार, किसका था दबाव?

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस काफी समय से गिरफ्तार युवक की तलाश कर रही थी। गिरफ्तारी के बाद अचानक बड़ी संख्या में लग्जरी गाड़ियों से लोगों के थाने पहुंचने की चर्चा ने मामले को और गरमा दिया है। आरोप हैं कि वहां गिरफ्तार युवक को राहत दिलाने के लिए संपर्क और सिफारिश के प्रयास किए गए। यहां सवाल उठता है कि आखिर इस मामले में किन लोगों की दिलचस्पी है और क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने पुलिस कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश की? इन सवालों का जवाब पुलिस के आधिकारिक बयान और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

अयोध्या के संत से लाखों रुपये लेने का आरोप

फतेहपुर के इस कथित भूमाफिया का नेटवर्क अयोध्या तक फैले होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि एक ढाबा संचालक के माध्यम से हनुमानगढ़ी से जुड़े एक संत से संपर्क हुआ था। आरोप है कि करोड़ों रुपये का सपना दिखाकर संत से लाखों रुपये लिए गए, लेकिन रकम वापस मांगने पर कथित तौर पर संत को संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यह भी दावा किया जा रहा है कि संपर्क करने के बावजूद फोन नहीं उठाया जा रहा है। हालांकि, इस मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

मेडिकल कॉलेज के आसपास जमीन के सौदों पर भी सवाल

मलवां क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज के आसपास जमीन के सौदों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ किसानों को जमीन के मामलों में गुमराह करके सौदे किए गए। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह जांच का विषय है कि किन लोगों ने जमीन के सौदे कराए, कितनी रकम का लेनदेन हुआ और क्या किसी किसान के साथ धोखाधड़ी की गई।

मुकदमों के बावजूद हिस्ट्रीशीट क्यों नहीं खुली?

मामले में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। सूत्रों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं, इसके बावजूद उसकी हिस्ट्रीशीट खोले जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सवाल यह भी है कि यदि आरोपित के खिलाफ लगातार आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं, तो पुलिस ने नियमानुसार क्या कार्रवाई की? हालांकि, किसी व्यक्ति की हिस्ट्रीशीट खोलने का निर्णय पुलिस रिकॉर्ड, आपराधिक गतिविधियों और निर्धारित नियमों के आधार पर लिया जाता है।

इससे पहले एक पुलिस अधिकारी के आवास पर कथित भूमाफिया की गाड़ी खड़ी होने की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भी चर्चाएं तेज हुई थीं। इस तस्वीर को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। केवल किसी अधिकारी के आवास पर वाहन खड़ा होने की तस्वीर से संरक्षण का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

क्या सत्ता के संरक्षण में चल रहा है पूरा खेल?

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि सत्ता से जुड़े एक विधायक के साथ कथित भूमाफिया की नजदीकियां हैं। आरोप यह भी हैं कि इन्हीं संबंधों के चलते उसे प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने में मदद मिलती रही। अब उसके भाई की गिरफ्तारी के बाद कथित सिफारिशों की चर्चा ने राजनीतिक संरक्षण के सवाल को फिर हवा दे दी है। हालांकि, संबंधित विधायक की भूमिका और किसी हस्तक्षेप के दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की तैयारी का दावा

सूत्रों का दावा है कि जमीन के सौदों, संत से कथित लेनदेन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े पूरे मामले को जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जा सकता है। अब देखना होगा कि झांसी पुलिस की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और फतेहपुर पुलिस इन सवालों पर क्या रुख अपनाती है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि आरोपों में दम है, तो कथित जमीन सौदों, लाखों रुपये के लेनदेन और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कब होगी?

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