आज उन भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती है जिन्होने वी . पी. मेनन के साथ मिलकर अंग्रेजों द्वारा स्वतंत्रता प्रदत्त विखंडित 500 से अधिक रियासतों को स्वतंत्र भारत संघ में मिलाकर एक अखंड राष्ट्र निर्मित किया। जिसमें हैदराबाद ,जूनागढ़ और जम्मू कश्मीर जैसी रियासतों को मिला पाना उनके द्वारा ही संभव था। वरना इस विखंडित राष्ट्र की स्वतंत्रता का कोई भी अर्थ ना निकलता।
इनका जन्म नाडियाड गुजरात में 1875 में पिता झाबेर भाई पटेल और माता लाडबाई के यहां हुआ। इनकी पत्नी का नाम झबेरवा पटेल था। इनके पुत्र का नाम दह्या पटेल तथा पुत्री का नाम मणिबेन है।
महात्मा गांधी से प्रभावित हो यह वकालत का पेशा त्याग कर स्वतंत्रता आंदोलन में सम्मिलित हो गए। इन्होंने 1918 में खेड़ा सत्याग्रह और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई और ऐतिहासिक सफलता अर्जित की । 1928 में बारडोली सत्याग्रह आंदोलन की सफलता पर वहां की महिलाओं ने इन्हें सरदार की उपाधि से विभूषित किया। 1931 में करांची कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष नियुक्त हुए। 15 सितंबर 1950 में अचानक हृदय गति अवरुद्ध हो जाने से इनका निधन हो गया जिससे इस देश का एक समर्पित नायक भारत ने सदा- सदा के लिए खो दिया लेकिन उनके द्वारा देश के प्रति किए गए उपकारों को कभी भी भूला नहीं जा सकता। इनके जीवन की अनेकानेक घटनाएं लोगों को त्याग ,वलिदान और देश के प्रति सर्वस्व समर्पण की अहर्निश शिक्षा प्रदान करती रहेंगी।
1991 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 182 फीट ऊंची स्टैचू ऑफ यूनिटी के रूप में उनकी प्रतिमा का उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को संपन्न हुआ। उनकी इस जन्म जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र का उन्हें शत-शत नमन।
“उन सा जीवन जी सके , नहीं हंसी या खेल।
अजर – अमर सबके हृदय, में सरदार पटेल।।”
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राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती : दिनांक 31 अक्टूबर 2026लेखक : शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी
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