फतेहपुर। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 457 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- मातु हंस वाहिनी, मां मंजु वीणाधारिणी,
ज्ञान का प्रकाश कर बुद्धि को निखारिए।
घना अंधकार आज छाया हुआ देश में,
राष्ट्रभक्ति , सद्भाव सबमें प्रसारिए ।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- पितरों का सम्मान है, संस्कृति का आधार।
यही सनातन सभ्यता ,उनके प्रति आभार।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – मोदी जैसा नेता मिलता ,युगों- युगों के बाद। उत्साहित जनमानस दिखता, बहुत दिनों पश्चात।।
आचार्य विष्णु शुक्ल ने पढ़ा-मांगना मरने के जैसा है क्या मांगू तुझसे,
बिना मांगे मुझे कुछ देके तू जिंदा कर दे।
राजे रंगरेज, मुझे रंग ले रंग में अपने,
मेरे गोविंद, मुझे गीत गोविंदा कर दे।।
राम अवतार गुप्ता ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- राम नाम रस प्रेम से, अपने मन में घोल।
बिगड़ेगा कुछ भी नहीं, मीठा-मीठा बोल।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये -भारतीय कैप्टन स्मित ने, किया वीरता का जो काज।
भारत को ही नहीं , समूची दुनिया को है उस पर नाज।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – स्मित मच्छर ने किया,नभ में गजब कमाल।
रखा सुरक्षित यान को, देकर नई मिसाल।।
धीरेंद्र पाल ने पढ़ा-मुझे अपनी ये बेड़ियां तोड़ना है।
गुलामी भरा रास्ता छोड़ना है।।
जरूरी है खुद को नया रूप देना,
पुराने में भी कुछ नया जोड़ना है।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक तथा संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने एक मुक्तक के माध्यम से अपने भाव कुछ इस प्रकार व्यक्त किये- पितरों के आशीष से ,ही जीवन संपन्न ।
श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर, करिए उन्हें प्रसन्न।।
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।





