फतेहपुर।जिला पंचायत सीट बागबादशाही से इस बार सियासी सरगर्मी कुछ अलग नजर आ रही है। जहां एक ओर पारंपरिक राजनीति में दावेदारों की लंबी कतार है, वहीं दूसरी ओर साजिया खान ने खुद को “नेता” नहीं, बल्कि “क्षेत्र की बेटी” के रूप में पेश करते हुए चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान किया है।
राजनीति की इस भीड़ में, जहां अक्सर सत्ता और पद की होड़ दिखाई देती है, साजिया खान की एंट्री एक अलग संदेश देती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका उद्देश्य कुर्सी पाना नहीं, बल्कि जनता के हक और सम्मान की आवाज बनना है।
✦ “डर नहीं, भरोसा” का संदेश
साजिया खान ने अपनी अपील में कहा—
“मैं चाहती हूँ कि आपको अपनी समस्या लेकर मेरे पास आने में झिझक न हो। आप खुलकर अपनी इस बेटी से दिल की बात कह सकें।”
उनका कहना है कि राजनीति और जनता के बीच जो दूरी बन गई है, उसे खत्म करना जरूरी है। वे खुद को ऐसी प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करना चाहती हैं, जिसके दरवाजे हर समय खुले रहें।
✦ विचारधारा से ज्यादा जनता की जरूरत
साजिया खान ने यह भी स्पष्ट किया कि यह चुनाव किसी एक दल की विचारधारा का नहीं, बल्कि क्षेत्र की आम जनता की जरूरतों और विचारों का चुनाव है। उनका दावा है कि वे हर वर्ग—महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंद परिवारों—की आवाज को पंचायत स्तर पर मजबूती से उठाएंगी।
✦ “सत्ता नहीं, सेवा” का संकल्प
उन्होंने कहा—
“यह लड़ाई कुर्सी पाने के लिए नहीं, बल्कि आपके हक और सम्मान के लिए है।”
उनका जोर शिक्षा, स्वच्छता, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर रहेगा।
✦ जनता की नजरें नई सोच पर
बागबादशाही क्षेत्र में अब यह चर्चा का विषय बन चुका है कि क्या साजिया खान की “बेटी और बहन” वाली राजनीति पारंपरिक समीकरणों को चुनौती दे पाएगी। स्थानीय स्तर पर लोगों में जिज्ञासा और उम्मीद दोनों दिखाई दे रही हैं।
आगामी चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि सेवा और संबंध की यह नई परिभाषा मतदाताओं के दिल तक कितनी गहराई से पहुंचती है। फिलहाल, साजिया खान ने साफ कर दिया है कि उनकी राजनीति का केंद्र बिंदु सत्ता नहीं, बल्कि जन-सेवा और भरोसा होगा।








