फतेहपुर – शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 398 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी संपन्न शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में 398 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के. पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी भार्गव महाराज उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के. पी . सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां आइए,करो नमन स्वीकार।
वाणी को निर्मल करो, दो कविता में धार।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- वासुदेव श्रीकृष्ण हैं, जग के गुरू महान।
भगवद्गीता में दिया , कर्मयोग का ज्ञान।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – प्रेम जगत का सार है, मिलिए सबसे धाय।
काहू से मत बैर कर, मन में मैल न लाय।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – बंदनवार बंधी द्वारे पर, आंगन ढोलक शहनाई।
जसुमति के घर कान्हा जन्मे, मंगलमयी घड़ी आई।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – आओ सब मिल अनुकरण करें, आदर्श कृष्ण ने जो दीन्हा।
विकसित भारत हित काम करें, जो पी.एम.ने है प्रण कीन्हा ।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक गीत के माध्यम से कुछ यों व्यक्त किये- जिसके उर प्रीति – प्रतीति नहीं, वह भक्ति के तत्व को जानेगा क्या?
जिसका हिय गोकुल हो न सका, वह कान्ह, तुझे पहचानेगा क्या?
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।






