फतेहपुर में गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती दिखाई दे रही है। जिले के अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर गौमाता को राष्ट्रीय माता घोषित किए जाने की मांग की है। अधिवक्ताओं का कहना है कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है, लेकिन वर्तमान समय में गौवंश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है। कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे अधिवक्ताओं ने कहा कि देशभर में गौशालाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कई स्थानों पर गायों को पर्याप्त चारा, पानी और चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर आवारा जानवरों की तरह भटकता नजर आता है, जिससे न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है बल्कि गौमाता के सम्मान और संरक्षण पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिया जाता है तो उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार को अधिक प्रभावी और कठोर नीतियां बनाने का अवसर मिलेगा। साथ ही गौवंश के रखरखाव, चिकित्सा और सुरक्षा के लिए विशेष योजनाएं लागू की जा सकेंगी। उन्होंने कहा कि गाय भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण आधार रही है, इसलिए उसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना समय की मांग है।
ज्ञापन के माध्यम से अधिवक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि गौवंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाए जाएं, गौशालाओं की नियमित निगरानी हो और सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गौवंश के संरक्षण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी। फिलहाल अधिवक्ताओं द्वारा उठाई गई यह मांग चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और गौसंरक्षण को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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गौमाता को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग तेज, अधिवक्ताओं ने डीएम के माध्यम से सरकार को सौंपा ज्ञापन
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