Homeउत्तर प्रदेशफतेहपुरजिंदगी यह मेरी एक तमाशा रही। तेरी आंखों की जो मौन भाषा...

जिंदगी यह मेरी एक तमाशा रही। तेरी आंखों की जो मौन भाषा रही ।। रात भर यूं ही करवट बदलते रहे, तेरे आने की जो एक आशा रही।।

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फतेहपुर- शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 404 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 404 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के. पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी जी उपस्थित रहे । काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के. पी . सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- ज्ञान दायिनी सरस्वती मां, तुम्हें नमन सौ बार।जीवन का अज्ञान हर ,मां कर दो उद्धार।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- जीएसटी कानून है, जनता को सौगात । विकसित होगा देश अब, देकर जग को मात।। डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – मां, तू ज्ञान – ध्यान की दात्री, तुझे नमन सब करते ।
तेरी कृपा दृष्टि पाकर ही ,सब विपदाएं हरते।। उमाकांत मिश्र ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- जिंदगी यह मेरी एक तमाशा रही। तेरी आंखों की जो मौन भाषा रही ।। रात भर यूं ही करवट बदलते रहे,
तेरे आने की जो एक आशा रही।। प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – हैं बच्चों की मम्मी भी खुश, घटा जीएसटी का है रेट। खर्च हुए कम, बढ़ा दिख रहा,अब पापा के तन का वेट ।। डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – बचपन खोता जा रहा, मोबाइल के संग।
करिए अइस उपाय कछु, जीवन होय न तंग ।। राम अवतार गुप्ता ने पढ़ा-आपने सारे जग को तारा।
संकट में मां, सबको उबारा ।। तारो ‘राम अवतार ‘। ऐ मैया मोरी, नैया लगाओ पार।। रविंद्र कुमार तिवारी ने पढ़ा- उठ चंडी, रणभेरी बजती,छाया जग अंधियार। दुष्टदलनि मां, खड्ग हाथ ले, मानव करे पुकार ।। अनिल कुमार तिवारी ‘निर्झर’ ने पढ़ा-दहन दशानन का जब होता, छाती खुशी अपार। मन के रावण को मारो तो,हो सुखमय संसार।। काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव सरदार भगत सिंह की 118 वीं जयंती के अवसर पर एक गीत के माध्यम से कुछ यों व्यक्त किये- भगत सिंह सा और कौन है, अमर वीर वलिदानी।
जिसने मां को भेंट चढ़ा दी ,चढ़ती हुई जवानी ।। इसके पश्चात् चल रहे नवरात्रों के उपलक्ष्य में भी अपने विचार कुछ इस प्रकार व्यक्त किये – नारी के ही रूप में, नवदुर्गा साकार। जीवन सफल बनाइए,रख उत्तम संस्कार।। कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।

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