इस बार करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026 को पड़ रहा है और चंद्रोदय का समय रात्रि 7:57 है । चंद्र दर्शन के पश्चात ही समस्त पूजन विधि और पारण इत्यादि का नियम है । सर्वप्रथम यह व्रत अंबा पार्वती ने भगवान शंकर की दीर्घायु के लिए किया था तभी से लोक में इसका प्रचलन हुआ।
आदर्श पति- पत्नी भगवान श्री हरि और माता लक्ष्मी का ही स्वरुप हैं। हमारे शास्त्रों ने एक स्वर से “धन्यो गृहस्थाश्रम:” कहकर जिसको महत्व प्रदान किया उसी पर शेष तीनों आश्रमों के भरण- पोषण का भार है। ब्रह्मचर्य, वानप्रस्थ एवं सन्यास इसी का संबल पाकर अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं। यह व्रत पति और पत्नी के बीच में गहन प्रेम भाव, सेवा ,समर्पण एवं विश्वास की अटूट शिक्षा प्रदान करता है ।
लोक में जहां ‘पति परमेश्वर’ शब्द का प्रयोग है वहीं अग्नि पुराण में एक स्थान पर आया है “नास्ति भार्या समं भोगं,नास्ति भार्या समं सुखम्।
नास्ति भार्या समं तीर्थं, तारणाय हिताय च।” इसके अलावा मनुस्मृति का यह वचन – “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता:।
यत्रैतास्तु न पूज्यंते, सर्वास्तत्रा क्रिया:अफला:।।” प्रसिद्ध ही है।
एक स्थान पर गृह लक्ष्मी का वर्णन करते हुए उसकी छ: विशेषताएं बतलाई गई हैं – “कार्येषु दासी,करणेसु मंत्री,रूपे च लक्ष्मी,क्षमया धरित्री।
भोज्येषु माता,शयनेषु रम्भा, षट्कर्मयुक्ता कुलधर्मपत्नी।।”
‘पति-पत्नी के बीच का सामंजस्य ही परिवार के रथ को सुख- सौभाग्य के पथ पर आगे बढ़ाता है। क्रोध, कटुता,अविश्वास, वैमनस्य और कलह उसे नष्ट -भ्रष्ट कर देते हैं।’ आज के अल्ट्रा मॉडर्न युग को भी यह समझना चाहिए तभी संबंधों में स्थिरता संभव है ।
“ज्यों चंदा में चांदनी, रहे परस्पर नेह।
सुख सुहाग संपत्ति संग, स्वर्ग विराजे गेह।।
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दांपत्य प्रेम का महापर्व – करका चतुर्थी (करवा चौथ) : दिनांक 29 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवारलेखक : शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी
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