फतेहपुर- शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 402 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 402 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के. पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के. पी . सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- मातु सरस्वती , वंदना, अर्पित चंदन फूल।
मेटो मन की मूढ़ता, जो जीवन में शूल।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- हिंदी भाषा राष्ट्र की, गौरव वा पहचान।
करें सदा इसको नमन, हो इस पर अभिमान ।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – जस पानी का बुलबुला, तस मानुष का तन।
नास होत नहिं देर है, यह सब जानत मन।।
नवीन शुक्ल ने पढ़ा – हमीं बनकर रहे सबके, कोई अपना न हो पाया।
सिसकती ख्वाहिशों का पूर्ण, इक सपना न हो पाया।।
बहुत गाए गए ,हम महफिलों, वीरानों में लेकिन ,
किसी मन- पृष्ठ पर अब तक, मगर छपना न हो पाया।।
दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- मेरे मन- मानस के मिलिंद। कर भजन सदा राधा – गोविंद।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – नगर जुड़ रहे गांव – गांव से ,डिजिटल हुआ है अपना देश।
पहुंच गई श्रीनगर रेल,ले ‘वंदे भारत’ का संदेश।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – भारत भू के अमर सपूतो, करिए नित्य नया निर्माण ।
विकसित अपना देश बनाएं, करके निज जीवन वलिदान ।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव इस हिंदी दिवस के पावन पर्व पर एक गीत के माध्यम से कुछ यों व्यक्त किये- भारत माता के माथे की, बिंदी हिंदी अपनी शान ।
एक बार फिर सब मिल बोलो, ” जय हिंदी, जय हिंदुस्तान।।”
इसके पश्चात उन्होंने एक सप्ताह से चल रहे श्राद्ध पर्व पर भी अपना विचार कुछ इस प्रकार से व्यक्त किया- मृत पितरों का श्राद्ध कर , दें श्रद्धा -सम्मान।
पर जीवित मां-बाप ही , सहें न दुःख – अपमान।।
कार्यक्रम के अंत में जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।







