फतेहपुर – शहर में नर्सिंग होम उद्योग की तरह संचालित हो गए हैं मौजूदा समय में फतेहपुर जिला मुख्यालय में करीब 175 नर्सिंग होम संचालित है इन नर्सिंग होम संचालकों में करीब पांच दर्जन से अधिक ऐसे नर्सिंग होम है जो अब एसटीएफ की रडार में शामिल हो गए हैं ऐसे संचालकों में उनके डॉक्टरों के खिलाफ किसी भी समय बड़ा एक्शन हो सकता है इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग भी इस कार्रवाई के दायरे में आ सकता है जिसको लेकर के एसटीएफ दस्तावेज खंगालने में जुटी हुई है। वह अपने तरीके से खंगाले जा रहे दस्तावेजो में कई ऐसे नर्सिंग होम निकाल कर सामने आए हैं जिन्होंने पंजीयन तो करा रखा है लेकिन उनके यहां डॉक्टर आते ही नहीं साथ ही मनमानी ढंग से मरीजों से वसूली भी करते हैं कई ऐसे भी नर्सिंग होम है जिनका पंजीयन नहीं है। पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तो यह है कि अग्निशमन विभाग का एक सिपाही जो कि पिछले 7 वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात है उसके द्वारा विभिन्न नर्सिंग होम संचालको को सेटिंग गेटिंग के तहत बाकायदा NOC भी उपलब्ध करा दी जाती हैं और इसके बदले में मोटी भी हासिल की जाती है यह सिपाही भी STF की रडार में शामिल है।
फतेहपुर जिले में नर्सिंग होम संचालकों को लेकर काफी समय से अफरा तफरी का माहौल चल रहा है नर्सिंग होम संचालको में कई तो ऐसे हैं संचालक है और जिहोने ने भी अपने नाम के साथ डॉक्टर शब्द जोड़ रखा है शहर के हाईवे के किनारे संचालित हो रहे आधा दर्जन नर्सिंग होम तो ऐसे हैं जो मरीज व उनके तीमारदारों का उत्पीड़न करते हैं यह सारी शिकायतें प्रदेश सरकार में पहुंची है और इसी को लेकर के अब मौजूदा समय में एसटीएफ के रडार में कई नर्सिंग होम संचालक आ गए हैं जिनके खिलाफ बड़ा एक्शन किए जाने की तैयारी है सूत्रों का कहना है कि जिले का स्वास्थ्य विभाग से लेकर के जिले के अफसर इन नर्सिंग होम के संचालकों की करगुजारियों को हमेशा से नजरअंदाज करते आए हैं यही वजह है कि अब प्रदेश सरकार को मौरंग की अवैध ओवरलोडिंग की तरह एसटीएफ को लगा करके नर्सिंग होम संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई करने का खाका तैयार किया गया है।








