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फतेहपुर में ‘मुल्ला गैंग’ से ‘नए प्राभारी’ तक: नोटिस की आड़ में नोटों का खेल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल!BJP अध्यक्ष बोले मामले को सज्ञान में लिया गया है जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।

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फतेहपुर। जिले में झोला छाप डॉक्टरों, मानक विहीन निजी अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड सेंटरों और पैथालॉजी लैब्स पर कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की मुहिम चर्चा में है। कागजों में नोटिस पर नोटिस जारी हो रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में कार्रवाई कम और वसूली की चर्चा ज्यादा सुनाई दे रही है।

सूत्रों की मानें तो पहले यह पूरा खेल सीएमओ कार्यालय में सक्रिय तथाकथित “मुल्ला गैंग” के इर्द-गिर्द घूमता था। आरोप है कि नोटिस जारी कर फाइलें गर्म रखी जाती थीं और फिर सेटिंग के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता था। हालांकि हाल के दिनों में इस गैंग से कार्यभार लेकर नए “झोला छाप प्राभारी” की तैनाती कर दी गई, लेकिन हालात में खास बदलाव नजर नहीं आया।

बताया जा रहा है कि नए प्राभारी पीके सिंह कार्रवाई का दावा तो करते हैं, लेकिन उनके मातहतों पर नई तकनीकी से वसूली करने के आरोप लग रहे हैं। चर्चा है कि पहले जहां सीधे दबाव बनता था, अब “सिस्टमेटिक मैनेजमेंट” के जरिए मानक विहीन अस्पतालों से तालमेल बैठाया जा रहा है।

जोनिहा कस्बे का मामला भी गरमाया
जोनिहा कस्बे में एक बंगाली डॉक्टर का नाम सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों का दावा है कि उक्त डॉक्टर को एक मंत्री स्तर से संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि यह डॉक्टर गरीब मरीजों को शहर के निजी नर्सिंग होमों में रेफर कर बड़े पैमाने पर कमीशन का खेल चला रहा है।

उधर शहर के देवीगंज इलाके में बिना पंजीयन के एक अन्य बंगाली डॉक्टर ने “नामर्दी दूर करने” के दावे वाले बड़े-बड़े पोस्टर लगा रखे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की पैनी नजर इन पोस्टरों और क्लीनिक पर नहीं पड़ी।

बिना कागज के अल्ट्रासाउंड सेंटर?
सूत्र बताते हैं कि शहर में आधा दर्जन से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटर ऐसे हैं, जिनके कागज पूरे नहीं हैं, फिर भी वे धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। आरोप है कि मुल्ला गैंग के एक सदस्य की इनमें साझेदारी तक है।

सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अगर कार्रवाई की जगह वसूली का खेल चलता रहा तो यह न केवल मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है, बल्कि सरकार की छवि पर भी सीधा आघात है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या वाकई “मुल्ला गैंग” और नए झोला छाप प्राभारी के गठजोड़ पर उच्चस्तरीय जांच होगी? या फिर नोटिसों की फाइलें यूं ही घूमती रहेंगी और स्वास्थ्य व्यवस्था बदनाम होती रहेगी?

जिले की जनता जवाब चाहती है — कार्रवाई या फिर सिर्फ कागजी खानापूर्ति? इस मामले में BJP अध्यक्ष अन्नू श्रीवास्तव का कहना है इस मामले को संज्ञान में लिया गया है शासन से लिखा पढ़ी कर कार्यवाई कराई जाएगी।

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