फतेहपुर- भले ही असोथर विकास खंड के सरकंडी में भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद मनरेगा में बड़ा घोटाला सामने आया हो और 10 लोगों पर मुकदमें के बाद उन पर कार्रवाई की तैयारी हो लेकिन हकीकत में तो जिले में मनरेगा की मिट्टी से ही प्रधान,सचिव,रोजगार सेवक एवं बीडीओ बड़ा खेल कर रहे हैं।ऐसी अनगिनत ग्राम पंचायतें हैं जहां मनरेगा में पानी की तरह पैसा हर साल बहाया जा रहा है लेकिन विकास की तस्वीर साल-दर-साल धुंधली ही है।पंचायत चुनाव की बहनी शुरू हुई बयार के बाद गांवों में विरोध के स्वर उभरने शुरू हो गए हैं।हकीकत तो यही है कि मनरेगा प्रधानों की कमाई का बड़ा चारागाह है।कमीशन के चक्कर में अफसरों की चुप्पी कुछ इस तरह से रही कि कभी भी उन्होंने विकास खंडों के टॉप-5 या टॉप-10 उन ग्राम पंचायतों को खंगालना भी मुनासिब नहीं समझा जो 50-60 लाख ही नहीं 01करोड रुपए से भी अधिक एक साल में खर्च कर रहे हैं।बोगस जाब कार्डधारियों के जरिए मजदूरों को भरकर उन्हें खुशबख्शी में 500-1000 रुपए पकड़ाने वाले बदले में उनके खाते में जा रही मजदूरी की पूरी की पूरी धनराशि डकार रहे हैं।इसमें रोजगार सेवक सेतु का काम कर रहे हैं। गांवों में मनरेगा के भ्रष्टाचार की पोल की शुरुआत खजुहा विकास खंड से शुरू होकर 13 विकास खंडों एवं क्षेत्र पंचायतों तक पहुंच पड़ताल यह बताने के लिए काफी होगी कि किस तरह से सरकारी खजाने को जिम्मेदारों ने यहां बंदर बांट कर योजना का बंटाधार कर दिया।
फतेहपुर जिले के 13 विकास खंडों कि 816 ग्राम पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों के जरिए हर साल 400 करोड़ के करीब की खपने वाली मनरेगा की धनराशि भ्रष्टाचारियों की जेब का बड़ा हिस्सा बन रही है।कमीशन के चल रहे बड़े खेल के चलते जिम्मेदारों की चुप्पी ने भ्रष्टाचारियों के हौसलें बढ़ा कर रखें हैं।काम पर न जाने वाले जाब कार्डधारी मजदूर इनकी कमाई का बड़ा जरिया हैं।ग्रामीण विकास मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट सामने आई है उसमें क्षेत्र पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों में खर्च की गई धनराशि का जो डाटा आया है वह चौंकाने वाला है।वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक ग्राम पंचायतों ने जी-खोल कर पैसा खर्च किया और सरकारी खजाने को बाट लगा दी।खजुआ विकास खंड के बहादुरपुर में 4 सालों में 01करोड़ 46 लाख रुपए,भीखमपुर में 01करोड़ 42 लाख रुपए,मंसूरपुर में 01करोड़ 40 लख रुपए,मिस्सी में 01करोड़ 19 लाख रुपए,टिकरी मनौटी में 02करोड़ 53 लाख रुपए और खांडेदेवर में 01करोड़ 82 लाख रुपए की भारी भरकम धनराशि केवल मनरेगा में खर्च कर दी गई।
इसके अलावा शिवरी,मंडरांव,तेंदुली,अमेना,बरदरा, बरेठर बुजुर्ग,बेहटा,बेनू,भेवली,दरौटा लालपुर,हसनपुर,खूंटा,टांडा अमौली जैसी ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां बड़ी रकम मनरेगा में खर्च की गई।उन्हीं कामों को साल-दर-साल दोहराने के आदी हो चुके प्रधानों,सचिव,रोजगार सेवकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती रही लेकिन गांवों की बदरंग तस्वीरों को सुधारा नहीं जा सका।विकास खण्डों में बैठे कंप्यूटर ऑपरेटर,खंड विकास अधिकारियों एवं रोजगार सेवक घोटालेबाज ग्राम प्रधानों के बड़े संरक्षक एवं वाहक बने हुए हैं।कमीशन के चक्कर में उनकी चुप्पी ने जिले में मनरेगा का बंटाधार कर रखा है।सेटिंग-गेटिंग के चल रहे बड़े खेल का ही नतीजा है कि मनरेगा की जांच की आंच सरकंडी तक पहुंची तो आग का धुआं लपट बनता दिखाई दे रहा है।हकीकत में विकास खंडों की टॉप-10 ग्राम पंचायतों के साथ कामों की जांच कराई जाए तो मनरेगा के भ्रष्टाचार की बड़ी पोल खुल कर सामने आएगी।बिना काम पर गए जॉब कार्डधारी को मामूली रकम पकड़ा कर मजदूरी की धनराशि डकारने वालों का चेहरा सामने आ जाएगा।
Trending Now
मनरेगा की मिट्टी से सोना बनाते रहे प्रधान चुप्पी साधे रहे “अफसर”ग्राम पंचायतों एवं क्षेत्र पंचायतों ने मनरेगा में मिलकर लगा दी बाट
👁 28.7K views







