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यूपी बिजली विभाग का नया फरमान: 1200 यूनिट का नया नियम लागू, दायरे में आने वाले उपभोक्ताओं को झटका

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उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक नई मुश्किल खड़ी हो गई है। राज्य विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश के अनुसार 1200 यूनिट सालाना से कम बिजली खपत करने वालों को लाइफलाइन टैरिफ यानी रियायती दर का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन बिजली कंपनियों ने स्वीकृत लोड बढ़ने के आधार पर इन्हें भी इस सुविधा से बाहर कर दिया है। इससे उपभोक्ताओं को दोहरी मार पड़ी है।

बिजली बिल में बड़ा फेरबदल

यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस व्यवस्था को टैरिफ आदेश की भावना के विपरीत बताया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि टैरिफ आदेश में साफ प्रावधान है कि पूरे वित्तीय वर्ष में खपत 1200 यूनिट से अधिक होने पर ही लाइफलाइन श्रेणी से बाहर किया जा सकता है। लोड बढ़ने को आधार बनाकर रियायती दर छीनना गलत है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अगर किसी उपभोक्ता की सालाना खपत मात्र 1000 यूनिट है लेकिन लोड 1 किलोवाट हो गया तो उसे रियायती दर से वंचित करना उचित नहीं।

47 लाख उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया

यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने जुलाई माह में ही करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का स्वीकृत बिजली लोड बढ़ाया है। इनमें लगभग 15 लाख वे उपभोक्ता शामिल हैं जिनके पास पहले 1 किलोवाट का कनेक्शन था और वे लाइफलाइन टैरिफ का लाभ ले रहे थे। परिषद का दावा है कि इनमें बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं जिनकी सालाना खपत 1200 यूनिट से कम है, फिर भी लोड बढ़ने के कारण उन्हें सामान्य दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी।

इस मामले को लेकर 7 जुलाई को राज्य विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व की याचिका दायर की गई है। उपभोक्ता परिषद ने आयोग से कानूनी पड़ताल कर इस आदेश की समीक्षा करने और प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। परिषद ने विद्युत वितरण संहिता 2005 का भी हवाला दिया है।

स्मार्ट मीटर vs सामान्य मीटर

राज्य में करीब 90 लाख उपभोक्ताओं के पास स्मार्ट मीटर लगे हैं, जबकि लगभग 3 करोड़ उपभोक्ता अभी भी पुराने मीटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। परिषद का कहना है कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधान के स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं वाली व्यवस्था को सामान्य मीटर वालों पर लागू नहीं किया जा सकता।

यह पूरा मामला आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गया है। खासकर ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा, क्योंकि बढ़ी हुई दरें उनके मासिक खर्च को प्रभावित करेंगी। बिजली कंपनियों का कहना है कि लोड बढ़ाने से सिस्टम बेहतर होगा, लेकिन उपभोक्ता संगठन इसे बिना पूर्व सूचना और सहमति के एकतरफा कदम मान रहे हैं।

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