फतेहपुर। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर परिसर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 439वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार के.पी. सिंह कछवाह ने की, जबकि संचालन शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष के.पी. सिंह कछवाह ने वाणी वंदना के साथ किया। उन्होंने मां सरस्वती का आह्वान करते हुए कहा—
“सरस्वती मां, आइए, कविजन करें पुकार।
वाणी में मां, शक्ति दो, दो रचना में धार।।”
इसके बाद उन्होंने जीवन के आध्यात्मिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा—
“मोह न कर झूठी काया का, यह काया है नश्वर।
तू अविनाशी, तू है शाश्वत, अंशी तेरा ईश्वर।।”
डा. सत्य नारायण मिश्र ने जीवन की परिवर्तनशीलता को अपने छंद में व्यक्त करते हुए कहा—
“यह जीवन कितना परिवर्तित, सुस्थिरता का आभास नहीं।
है उदय एक के जीवन में, तो अस्त अन्य का निहित कहीं।।”
लखनऊ से पधारे वरिष्ठ कवि कमलेश कुमार मौर्य ‘मृदु’ ने सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देते हुए कहा—
“पशुता-नरता से ऊपर उठ, चेतन को अपना लेना है।
संकेत कर रहे शास्त्र हमें, यह पशुबलि, नरबलि देना है।।”
प्रदीप कुमार गौड़ ने स्वास्थ्य जागरूकता पर आधारित रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“है शरीर अनमोल हमारा, हमको ही करनी रक्षा।
तंबाकू रोगों का कारक, अभी छोड़ दें तो अच्छा।।”
डॉ. शिव सागर साहू ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा—
“पर्यावरण सुधार हित सब जन करें उपाय।
हरी-भरी धरती करें, पौधे खूब लगाय।।”
राम अवतार गुप्ता ने दान, ज्ञान और त्याग के महत्व पर अपनी रचना प्रस्तुत की—
“देने की बात मन में हो, तो दान दीजिए।
लेने की बात मन में हो, तो ज्ञान लीजिए।।”
कार्यक्रम के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने उर्दू के महान ग़ज़लगो स्वर्गीय बशीर बद्र को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा—
“एक शायर क्या गया है, पूरी महफ़िल रो रही है।
क्या मुसाफिर था कि करके याद मंजिल रो रही है।।”
उन्होंने आगे कहा कि बशीर बद्र की शायरी इंसानियत और मोहब्बत का संदेश देती रहेगी।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि एवं मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल ने सभी साहित्यकारों और उपस्थित जनों को आशीर्वाद प्रदान किया। अंत में आयोजक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
यह काव्य गोष्ठी साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना के विविध रंगों से सराबोर रही तथा उपस्थित श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं का भरपूर आनंद लिया।






