फतेहपुर- जिले के विजयीपुर विकासखण्ड की ग्राम पंचायत विजयीपुर में मनरेगा की कार्यों में बड़ा घोटाला सामने आया है। जिसमें हाई प्रोफाइल घोटले में शामिल सरकंडी की तर्ज पर करीब 35 लाख रुपए का गबन किया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत हुए कार्यों में करोड़ों रुपये के बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। लोकपाल की जांच में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत स्तरीय कर्मचारियों और विकास खंड के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा मिलीभगत कर फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी धन के गबन और अनियमितताओं का मामला सामने आया है। इस मामले में शिकायतकर्ता प्रियेंद्र प्रताप सिंह द्वारा दिए गए शिकायती पत्रों के आधार पर विस्तृत जांच के बाद दोषियों के खिलाफ प्रशासनिक, दंडात्मक कार्यवाही और मनरेगा अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने के साथ ही वसूली की भी प्रबल संस्तुति की गई है।
जांच आख्या में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता श्री प्रियेन्द्र प्रताप सिंह के दोनों शिकायती पत्रों में अंकित बिन्दुओं की स्थलीय जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता के लिखित एवं मौखिक बयानों से यह पुष्टि हुई कि अनाधिकृत रूप से, बिना कार्य कराए, कूटरचित और फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी भूमि में बिना विभाग की अनुमति के कार्य कराए गए, जिनमें भारी धनराशि व्यय की गई।
घोटाले के प्रमुख बिंदु:
बिना काम के भुगतान:
कई मामलों में बिना कोई वास्तविक कार्य कराए ही कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
अपात्रों को लाभ:
मनरेगा के नियमों को ताक पर रखकर अपात्र व्यक्तियों को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने वाले कार्य कराए गए।
– *जेसीबी मशीन का दुरुपयोग:* मनरेगा के तहत मजदूरों से कराए जाने वाले कार्यों में जेसीबी मशीनों का अवैध रूप से प्रयोग किया गया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।
– *फर्जी मस्टर रोल:* जांच में मस्टर रोल में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी और कार्यक्रम अधिकारी के हस्ताक्षर गायब पाए गए। इसी तरह नरेगा लेखा सहायक, लेखाकार आदि के हस्ताक्षर भी नहीं मिले।
– *कंप्यूटर फीडिंग में गड़बड़ी:* बिना हस्ताक्षर वाले मस्टर रोल को कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा संज्ञान में लिए बिना ही कंप्यूटर में फीड कर दिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा संभव हुआ।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी अनियमितताओं से व्यय की गई धनराशि की वसूली दोषी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत स्तरीय कर्मचारियों से की जानी चाहिए।
लोकपाल ने अपनी सिफारिश में स्पष्ट किया है कि यह कूटरचित अभिलेख तैयार कर ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत स्तरीय कर्मचारियों और विकास खंड स्तरीय कर्मचारियों/अधिकारियों द्वारा अनियमित रूप से धनराशि का अपहरण/गबन का मामला है।
कड़ी कार्रवाई की सिफारिश:
जांच आख्या में यह भी सिफारिश की गई है कि अनियमित रूप से आहरित की गई धनराशि के संबंध में समस्त संबंधितों के विरुद्ध प्रशासनिक और दंडात्मक कार्यवाही की जाए। इसके साथ ही, मनरेगा अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत नियमानुसार दंडात्मक एवं विधिक कार्यवाही किए जाने की संस्तुति भी की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोषियों के विरुद्ध संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराने और बिना काम कराए आहरित की गई धनराशि की वसूली किए जाने की प्रबल संस्तुति की गई है।
इस जांच आख्या, मूल शिकायती पत्र की छाया प्रति और अन्य साक्ष्यों की छाया प्रति को आवश्यक कार्यवाही हेतु संबंधित उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया है। इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और ग्रामीण विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। देखना होगा कि इस मामले में कब तक और कितनी प्रभावी कार्रवाई की जाती है।









