फतेहपुर। रंगों के पर्व होली पर जहां बाजारों में रौनक है, वहीं मिलावटी खाद्य सामग्री और नकली रंग लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। जिले में मिलावटी खोया, नकली गुझिया और केमिकल युक्त अबीर-गुलाल खुलेआम बिक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम नजर आ रहा है।
खोया में मिलावट, गुझिया बन सकती है बीमारी की वजह
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बड़े पैमाने पर मिलावटी खोया तैयार किया जा रहा है। राधानगर इलाके में पाउडर और अन्य सस्ते पदार्थ मिलाकर नकली खोया ऊंचे दामों में बेचा जा रहा है। दुकानदार ग्राहकों को “शुद्धता” का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
बाजारों में नकली खोए की भरमार है, जिससे बनी गुझिया और मिठाइयां फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी-दस्त और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
केमिकल वाला गुलाल, त्वचा और आंखों के लिए खतरनाक
होली पर रंगों की मांग बढ़ते ही हरिहरगंज इलाके में कथित तौर पर प्लांट लगाकर POP (प्लास्टर ऑफ पेरिस) और अन्य केमिकल मिलाकर अबीर-गुलाल तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह कारोबार एक स्थानीय बीजेपी नेता से जुड़ा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
संचालक का कहना है कि माल कानपुर से आता है और यहां केवल पैकेजिंग की जाती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर रंग तैयार होने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, केमिकल युक्त गुलाल से त्वचा एलर्जी, आंखों में संक्रमण, सांस की तकलीफ और दमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
⚠️ सरकारी तंत्र के दावों पर सवाल
हालांकि खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन कार्रवाई के दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। खुलेआम मिलावटी सामान की बिक्री से साफ है कि जांच और छापेमारी का असर सीमित है।
सावधानी ही बचाव
केवल भरोसेमंद दुकानों से ही मिठाई खरीदें
खुला और सस्ता खोया लेने से बचें
हर्बल और ब्रांडेड रंगों का ही इस्तेमाल करें
बच्चों और बुजुर्गों को केमिकल वाले रंगों से दूर रखें
होली खुशियों और रंगों का त्योहार है, लेकिन मिलावटी सामान आपकी खुशियों पर पानी फेर सकता है। जरूरत है सजग रहने की और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की।









