रिपोर्ट-नर्सिंग मौर्य
फतेहपुर जिले के असोथर धान क्रय केंद्र पर धान खरीद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। क्षेत्र के किसानों ने डिप्टी आरएमओ शमीर शुक्ला और एसएमआईओ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि खरीद लक्ष्य पूरा होने का हवाला देकर केंद्र के गेट पर ताला बंद करवा दिया गया, जबकि करीब 30 प्रतिशत किसान अब भी अपना धान बेचने से वंचित हैं।
क्या है किसानों का आरोप?
किसानों का कहना है कि वे 1 जनवरी से लगातार क्रय केंद्र के चक्कर लगा रहे थे। एसएमआई द्वारा बार-बार 10–15 दिन बाद धान लाने को कहा जाता रहा और 28 फरवरी तक तौल कराने का आश्वासन दिया जाता रहा।
लेकिन जब किसान तय समय पर धान लेकर केंद्र पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि खरीद का लक्ष्य पूरा हो चुका है और अब धान नहीं लिया जाएगा।
डेढ़ महीने से केंद्र में ताला, फिर खरीद कैसे?
किसानों का दावा है कि पिछले डेढ़ महीने से असोथर क्रय केंद्र के अंदर एक भी बोरी धान नहीं पड़ी है। इसके बावजूद कागजों में हजारों कुंतल धान की खरीद दर्शाई जा रही है।
किसानों ने मांग की है कि यदि मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।
⚖️ कागजों में 1200 कुंतल खरीद का आरोप
किसानों के अनुसार 27 फरवरी 2026 को रिकॉर्ड में 1200 कुंतल धान खरीद दिखाया गया, जिसमें—
400 कुंतल – अखिलेश यादव
400 कुंतल – शेखर मौर्य
200 कुंतल – रामदयाल तिवारी
200 कुंतल – ललित कुमार
जबकि मौके पर धान की कोई वास्तविक तौल नहीं हुई।
व्यापारियों को प्राथमिकता?
किसानों का आरोप है कि छह कांटों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों कुंतल धान की खरीद कागजों में दिखाई जा रही थी। स्थानीय किसानों का धान अंदर नहीं जाने दिया गया, जबकि व्यापारियों और बिचौलियों की खरीद को प्राथमिकता दी गई।
28 फरवरी को व्यापारियों और बिचौलियों के अंगूठे लगवाने की होड़ भी देखने को मिली। किसान बताते हैं कि कोई एक एसएमआई के पास तो कोई दूसरे एसएमआई के पास दस्तखत कराने के लिए दौड़ता नजर आया।
️ राजनीतिक प्रतिक्रिया
सपा नगर अध्यक्ष फूलचंद्र वर्मा ने कहा कि किसानों के हित को देखते हुए मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी। जल्द ही शासन को पत्र भेजा जाएगा।
आंदोलन की चेतावनी
किसान संदीप कुमार, धर्मराज, सरवन कुमार सहित अन्य किसानों ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।








