यमुना वीहड पट्टी के खेतों में काफी अरसे बाद ज्वार बाजरा,तिल की फसलें देखकर किसानों के चेहरे खिले हुए हैं इस वर्ष अच्छी बरसांत हुई है और बेसहारा गोवंश संरक्षित होने से मोटे अनाज कि उपज का ग्राफ काफी बढ़ गया है असोथर विकास खंड क्षेत्र की ग्राम सभा सरकंडी, रामनगर कौहन,जरौली घाटमपुर,कोटवा,ऐझी
देईमऊ,सरवाल में एक दशक बाद बाजरा,ज्वार की फसल से किसानों के खेत भरे हैं मानसून सत्र में अच्छी बरसात हुई है और छुट्टा गोवंश गोशालाओ में संरक्षित किए गए हैं किसानों के द्वारा बोई गई फसलों में नुकसान नहीं हुआ फसल देखकर किसानों के चेहरे उत्साह से लबरेज है महिला कृषक सुशीला ने बताया कि काफी दिनों के बाद खेतों में बाजरे की फसल तैयार हुई है सरकंडी गांव में गौशाला बन जाने से अधिकांश गोवंश गौशाला में संरक्षित हो गए हैं जिससे अब फसलों में नुकसान नहीं हो रहा है नतीजा है कि खेतों में बिना सुरक्षा व्यवस्था के फसले खड़ी है मानाडेरा के कृषक वीएल निषाद ने बताया कि बहुत दिनों बाद ज्वार,बाजरे की अच्छी फसल खेतों में खड़ी देखकर मन प्रसन्न हो जाता है बगहा के रहने वाले अमरनाथ निषाद ने बताया कि ज्वार,बाजरा,अरहर और तिल असिंचित क्षेत्र में खरीफ सीजन की प्रमुख फैसले हैं पहले यमुना वीहड पट्टी के गांवों में आधे से अधिक खेतों में मोटे अनाज की फसल बोई और उगायी जाती थी इधर दस बारह साल से बारिश का औसत घटता गया और बेसहारा गोवंश,नीलगाय की संख्या बढती गयी जिससे फसलें तैयार करना बहुत कठिन हो गया था खंड विकास अधिकारी राहुल मिश्रा ने बताया कि बे-सहारा गोवंशियों को संरक्षित करने का भरसक प्रयास किया गया है आगे भी जारी रहेगा ब्लॉक स्तरीय सीड इंचार्ज शालू गौतम का कहना है कि उच्च क्वालिटी की मिनी किट किसानों को वितरित की गई थी इसी का नतीजा है कि खेतों में श्री अनाज की फैसले झूम रही है
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एक दशक बाद यमुना तलहटी के गाँव सरकंडी के खेतों में लहलहा रहीं श्रीअनाज की फसलें
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