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कारगिल विजय दिवस पर अमर शहीदों को नमन, पूर्व सैनिकों ने साझा किए युद्ध के यादगार पल

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फतेहपुर। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूर्व सैनिक उत्थान एवं लोक कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश के महिला संगठन की अध्यक्ष जागृति तिवारी के आवास पर श्रद्धा और उत्साह के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि और कारगिल युद्ध के अमर शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर की गई।
इस अवसर पर जागृति तिवारी ने बताया कि उनके पति पूर्व सैनिक विद्याभूषण तिवारी वर्ष 1999 में इलाहाबाद में तैनात थे। 7 मई 1999 को उन्हें कारगिल युद्ध में तत्काल रवाना होने का संदेश मिला। बोफोर्स तोप के रिपेयर विशेषज्ञ होने के कारण वे दिल्ली होते हुए श्रीनगर और फिर 9 मई को कारगिल पहुंचे। वहां उन्होंने बोफोर्स आर्टिलरी यूनिट से लगातार फायरिंग कर भारतीय सेना को निर्णायक बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूर्व सैनिक विद्याभूषण तिवारी ने कारगिल युद्ध के संस्मरण साझा करते हुए बताया कि 1 जुलाई 1999 को हुई एक गोपनीय बैठक में टाइगर हिल पर कब्जा करने की रणनीति बनाई गई थी। इस अभियान का नेतृत्व परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडे को सौंपा गया था, जबकि उन्हें और सूबेदार घोष को बोफोर्स से कवरिंग फायर देने की जिम्मेदारी मिली थी।
उन्होंने बताया कि जब कैप्टन मनोज पांडे को बुलेटप्रूफ जैकेट दी गई तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज के दिन के लिए ही मैं सेना में भर्ती हुआ था। मैं वापस अवश्य आऊंगा, जिंदा या तिरंगे में लिपटकर। जैकेट की जगह मुझे उतने वजन के हैंड ग्रेनेड दे दीजिए, ताकि दुश्मन को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकूं।” इसके बाद उन्होंने 10 हैंड ग्रेनेड अपने साथ रखे। ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन 3 जुलाई 1999 की रात कैप्टन मनोज पांडे मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
विद्याभूषण तिवारी ने बताया कि युद्ध के दौरान गोला-बारूद के धुएं के कारण उनके फेफड़ों और लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचा। विजय के बाद 10 अगस्त 1999 को उन्हें कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ में भर्ती कराया गया, जहां करीब दो माह उपचार के बाद उन्हें छुट्टी मिली।
कार्यक्रम में कैप्टन के.के. शुक्ला, किरण अवस्थी, पुष्पा तिवारी, सुमन मौर्य, अनुराग तिवारी, मधुलता सिंह, अर्चना गुप्ता, मिथलेश पाल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया।

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