फतेहपुर में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की प्रेस वार्ता तो हुई, लेकिन जगह ने असली सुर्ख़ी बटोर ली। शहर के बहुचर्चित होटल में कराई गई प्रेस वार्ता ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर सियासी चौपाल तक एक ही सवाल उछाल दिया—जब सरकारी बड़े-बड़े हॉल और सर्किट हाउस मौजूद हैं, तो होटल ही क्यों?
बताया जाता है कि प्रोटोकॉल में सर्किट हाउस का ज़िक्र था, मगर आख़िरकार प्रेस वार्ता होटल में सजी। अब चर्चा ये है कि क्या यह महज़ सुविधा का मामला था, या किसी होटल को “पॉपुलर” करने की रणनीति? कहीं ऐसा तो नहीं कि स्थानीय भाजपा नेताओं की मेहरबानी से होटल मालिक को ब्रांडिंग का बोनस मिल गया?
शहर में लोग चुटकी लेते हुए पूछ रहे हैं—सरकारी मंच कम पड़ गए या निजी मंच ज़्यादा ‘मैचिंग’ लग गए?
कुछ का कहना है कि होटल में इंतज़ाम बेहतर होते हैं, तो कुछ इसे प्रोटोकॉल से इतर फैसला बता रहे हैं। सवाल यह भी कि अगर हर बड़े आयोजन के लिए होटल ही चुने जाएंगे, तो सरकारी परिसरों की ज़रूरत क्या रह जाएगी?
फिलहाल जवाब किसी के पास पुख़्ता नहीं, लेकिन इतना तय है कि प्रेस वार्ता से ज़्यादा चर्चा उसकी जगह की हो रही है। फतेहपुर की राजनीति में इस बार बयान कि नहीं, लोकेशन हॉट टॉपिक बनी हुई है।








