फतेहपुर जिले के सिंचाई खंड निचली गंगा नहर विभाग में कथित तौर पर बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि करीब दस ऐसे कर्मचारी, जिन्हें कंप्यूटर टाइपिंग तो दूर माउस चलाना तक ठीक से नहीं आता, उन्हें नियमों को दरकिनार कर लिपिक यानी बाबू के पद पर प्रमोट कर दिया गया। इतना ही नहीं, अब ये कर्मचारी लिपिक का वेतनमान भी उठा रहे हैं। पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक पिछले वर्षों में मृतक आश्रित कोटे के तहत एलजीसी में 6 और सिंचाई खंड में 5 कर्मचारियों की चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति हुई थी। कुछ समय बाद इन कर्मचारियों को प्रमोशन दिलाने का कथित खेल शुरू हुआ। आरोप है कि आईटीआई में आयोजित टंकण और कंप्यूटर परीक्षा में सभी कर्मचारी फेल हो गए थे, लेकिन बाद में सेटिंग और लेनदेन के जरिए उन्हें पास घोषित कर दिया गया।
सूत्रों का दावा है कि कथित तौर पर प्रति कर्मचारी दो-दो लाख रुपये लेकर परीक्षा पास कराई गई। इसके बाद सभी को लिपिक पद पर पदोन्नत कर दिया गया। विभागीय कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि यदि इनकी दोबारा किसी स्वतंत्र समिति से परीक्षा कराई जाए तो अधिकांश कर्मचारी फेल हो जाएंगे।
मामले को लेकर विभाग में अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि कानपुर डिवीजन में इसी तरह के तीन कर्मचारियों को दूसरी कार्यदायी संस्था की टंकण परीक्षा में अनुत्तीर्ण पाए जाने पर वापस उनके मूल पद पर भेज दिया गया था। इसी कार्रवाई के बाद फतेहपुर में भी हलचल बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार जिले के कई भाजपा नेताओं ने भी इस पूरे मामले की शिकायत शासन और प्रशासन से की है। शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं चर्चा है कि जांच आगे बढ़ी तो कई कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द हो सकती है और उन्हें दोबारा मूल पद पर भेजा जा सकता है।
हालांकि अभी तक विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन आरोपों ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।






