फतेहपुर: यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा के दौरान शुक्रवार को जिले में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। सचल दल, स्टैटिक मजिस्ट्रेट और केंद्र व्यवस्थापक की संयुक्त कार्रवाई में 5 ‘मुन्ना भाई’ रंगे हाथों पकड़े गए। ये आरोपी असली अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड पर अपनी फोटो लगाकर गणित का पेपर दे रहे थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि सभी पांच-पांच हजार रुपये की लालच में दूसरे की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे।
हालांकि आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन इस पूरे खेल के पीछे सक्रिय नकल माफिया या संगठित गिरोह के नाम अब तक सामने नहीं आ सके हैं। ऐसे में कार्रवाई की दिशा और गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?
डीआईओएस राकेश कुमार को सूचना मिली थी कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर मूल परीक्षार्थियों की जगह दूसरे लोग परीक्षा दे रहे हैं। शुक्रवार को हाईस्कूल गणित की परीक्षा के दौरान टीम ने संदिग्ध केंद्रों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया।
जांच के दौरान पंडित दीनदयाल मॉडल इंटर कॉलेज में 5 फर्जी सॉल्वर पकड़े गए। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि ये सभी दूसरे छात्रों की जगह परीक्षा दे रहे थे।
कौन किसकी जगह दे रहा था परीक्षा?
जांच में सामने आया कि—
आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीतापुर बहरामपुर के छात्र गुलाम वारिस की जगह युवराज सिंह परीक्षा दे रहा था।
सौरभ की जगह प्रदीप कुमार बैठा मिला।
डॉ. मेवाराम दिव्य ज्ञान इंटर कॉलेज के छात्र शिवकुमार की जगह लक्ष्मण कुमार परीक्षा दे रहा था।
मोहम्मद अफजल के स्थान पर गणेश कुमार मिला।
ओपी इंटर कॉलेज बिलंदा के छात्र आसिफ खान की जगह रवि परीक्षा देता पकड़ा गया।
पूछताछ में सभी ने कबूल किया कि उन्हें प्रति परीक्षा 5 हजार रुपये देने का लालच दिया गया था।
संगठित गिरोह की आशंका
प्रथम दृष्टया जांच में संकेत मिले हैं कि इसके पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ हो सकता है। इतनी व्यवस्थित तरीके से एडमिट कार्ड में फोटो बदलकर परीक्षा दिलाने की कोशिश, किसी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है।
फिलहाल पुलिस ने थरियांव थाने में सभी आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया है।
विद्यालयों पर भी गिरेगी गाज
डीआईओएस ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड के नियमों के तहत संबंधित विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण (रद्द) करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
सवाल जो उठ रहे हैं
क्या केवल सॉल्वर गिरफ्तार कर लेने से नकल माफिया पर लगाम लगेगी?
जिन लोगों ने 5 हजार रुपये में यह सौदा तय कराया, वे अब तक बेनकाब क्यों नहीं हुए?
क्या जांच की आंच बड़े नामों तक पहुंचेगी?
फतेहपुर में पकड़े गए ‘मुन्ना भाई’ तो सलाखों के पीछे पहुंच गए, लेकिन असली मास्टरमाइंड तक कार्रवाई कब पहुंचेगी — यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
जिले में परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।








